वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत अब आम लोगों की थाली पर सीधा असर डाल रही है। शहर में होटल, रेस्टोरेंट और रेहड़ी-ढाबा संचालकों ने बढ़ती लागत के चलते खाने-पीने के दाम बढ़ा दिए हैं। जहां पहले सस्ती थाली 50 रुपये तक मिल जाती थी, अब वही 70 रुपये तक पहुंच गई है। पराठों के दाम भी 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये हो गए हैं।
सिर्फ ढाबों तक ही नहीं, रेस्टोरेंट्स में भी यही स्थिति है। लालपुल क्षेत्र के एक साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में मसाला डोसा 80 रुपये से बढ़कर 100 रुपये, पाव भाजी 80 से 100 रुपये और पनीर डोसा 110 से 130 रुपये तक पहुंच गया है। चाय की कीमत भी 10 रुपये से बढ़कर 12-15 रुपये प्रति कप हो गई है।
ब्लैक में महंगे मिल रहे सिलिंडर
रेहड़ी-ढाबा संचालकों का कहना है कि वाणिज्यिक सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग घरेलू या छोटे (3-5 किलो) सिलिंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि कई को ब्लैक में सिलिंडर खरीदने पड़ रहे हैं। सामान्यतः 1700-1800 रुपये में मिलने वाला सिलिंडर अब 4000 रुपये तक में मिल रहा है। वहीं छोटे सिलिंडरों में गैस भरवाने का रेट भी 100-110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया है।
सिलिंडर मिला तो दुकान खुली, खत्म होते ही ताला
गैस संकट के चलते कई छोटे ढाबे और रेहड़ियां बंद हो चुकी हैं। जो किसी तरह सिलिंडर का इंतजाम कर पा रहे हैं, वे ही दुकान चला पा रहे हैं। गैस खत्म होते ही उन्हें फिर दुकान बंद करनी पड़ती है। लालपुल-कारगी रोड वेंडिंग जोन में कई ढाबे इसी वजह से बंद पड़े हैं, जबकि कुछ संचालक भट्ठी या वैकल्पिक साधनों से काम चला रहे हैं। लालपुल-कारगी रोड पर वेंडिंग जोन में मौजूद कई रेहडी ढाबा चलाने वालों के ढाबे बंद हो चुक हैं। दो-चार जो फिलहाल चलते हुए पाए गए वह या तो भट्ठी का प्रयोग कर रहे हैं या फिर किसी तरह सिलिंडर का जुगाड़ कर अपना काम चला रहे हैं।
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