इजरायल में मिली 2100 साल पुरानी गोली

 आर्कियोलॉजिस्ट को इजरायल के प्राचीन शहर हिप्पोस में लगभग 2,100 साल पुरानी एक सीसे की गुलेल की गोली मिली है। इस गोली पर दुश्मन सेनाओं को निशाना बनाते हुए एक तीखा और व्यंग्यात्मक संदेश उकेरा गया है।

यह गोली हिप्पोस में एक प्राचीन सड़क के किनारे स्थित कब्रिस्तान वाले क्षेत्र से मिली है। प्राचीन काल में हिप्पोस को सुसिता के नाम से जाना जाता था। हेलेनिस्टिक काल के दौरान यह शहर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। बाद में बीजान्टिन काल में यह एक प्रमुख बिशप का केंद्र बन गया।

गोली पर लिखा संदेश

फॉक्स न्यूज डिजिटल के अनुसार, अधिकारियों ने इस गोली को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व का बताया है। इसमें यूनानी भाषा का शब्द सीखो उकेरा गया है। यह प्राचीन, अंडाकार आकार की सीसे की गोली है, जिसकी एक तस्वीर में यूनानी लिपि के हल्के निशान स्पष्ट दिखाई देते हैं।

हैफा विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद डॉ. माइकल आइजनबर्ग और उनकी सहयोगी डॉ. अर्लेटा कोवालेव्स्का का मानना है कि यह वाक्यांश एक व्यंग्यात्मक ताना था। मार्च 2026 में जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, आइजनबर्ग और कोवालेव्स्का ने अपनी खोज के निष्कर्ष Palestine Exploration Quarterly (PEQ) नामक जर्नल में प्रकाशित किए हैं।

उन्होंने बताया कि अकेले हिप्पोस में अब तक 69 ऐसी गोलियों की पहचान हो चुकी है, लेकिन यह दुनिया की पहली ऐसी गोली है जिस पर सीखो शब्द लिखा मिला है। यह शहर के रक्षकों के स्थानीय व्यंग्यात्मक हास्य को दर्शाता है। वे दुश्मनों को एक व्यंग्यपूर्ण इशारे के साथ सबक सिखाना चाहते थे कि अपना सबक सीखो।

कैसे चलाई गई होगी गोली?

यह पुरावशेष लगभग 3.2 सेंटीमीटर लंबा और 1.95 सेंटीमीटर चौड़ा है। इसका वर्तमान वजन 38 ग्राम है। खुदाई टीम का अनुमान है कि टकराव के कारण इसका मूल वजन लगभग 45 ग्राम रहा होगा। गोली पर टकराने के स्पष्ट निशान भी देखे गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, यह गोली संभवतः शहर के रक्षकों द्वारा शहर की दीवारों से चलाई गई थी, जब दुश्मन सेना शहर की ओर बढ़ रही थी। किसी गुलेल की गोली पर कोई लिखित संदेश मिलना बेहद दुर्लभ है।

किसी गोली पर यह विशेष यूनानी शब्द लिखा होना तो पूरी दुनिया में पहली बार हुआ है। उस समय सीसे की गोलियों को सस्ता लेकिन बेहद जानलेवा गोला-बारूद माना जाता था।

हिप्पोस में अन्य हालिया खोजें

पिछले साल हिप्पोस में हुई खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को 1,600 साल पुराना ईसाई केंद्र मिला था, जहां बुजुर्गों की देखभाल की जाती थी। यह दुनिया का सबसे पुराना नर्सिंग होम हो सकता है। इसी स्थल पर मेटल डिटेक्टर की मदद से प्राचीन गहनों और सोने के सिक्कों का एक बड़ा खजाना भी मिला था।

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