इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय महिलाओं की संख्या हुई दोगुनी

 इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारतीय महिलाओं ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। छठी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 2019-21 के 33.3 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 64.3 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, दो से चार साल के बच्चों में प्री-स्कूल में उपस्थिति 40.1% से बढ़कर 47% हो गई और 10 या उससे ज्यादा साल की स्कूली शिक्षा पाने वाली महिलाओं का अनुपात 41% से बढ़कर 46.4% हो गया।

डिजिटल पहुंच में आया बदलाव

हालिया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत में लड़कियों और महिलाओं के लिए शिक्षा और डिजिटल पहुंच, दोनों ही क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर हुई इन उपलब्धियों के बावजूद सर्वेक्षण में गहरी असमानताएं भी सामने आई हैं जो पूरे देश में शैक्षिक अवसरों को लगातार प्रभावित कर रही हैं। जहां शहरी भारत में 6 वर्ष और उससे अधिक आयु की लड़कियों और महिलाओं की स्कूल में उपस्थिति दर 84.3% है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 69.2% है।

स्कूल में उपस्थिति

डिजिटल पहुंच के मामले में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिला। जहां 77.3% शहरी महिलाओं ने इंटरनेट इस्तेमाल करने की बात कही, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा घटकर 58.6% रह गया।
2023-24 में हुए NFHS-6 सर्वे से पता चला कि 6 साल और उससे ज्यादा उम्र की 73.7% लड़कियों ने स्कूल में पढ़ाई की। NFHS-5 में यह आंकड़ा 71.8% था।
इसी दौरान, 2 से 4 साल की उम्र के बच्चों में प्री-स्कूल में उपस्थिति 40% से बढ़कर 47% हो गई।

स्कूल तक पहुंच में हो रहा सुधार

इन नतीजों से पता चलता है कि स्कूल तक पहुंच में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। हालांकि क्षेत्रीय और शहरी-ग्रामीण असमानताएं अभी भी काफी ज्यादा हैं।

सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक महिलाओं में माध्यमिक स्तर की शिक्षा प्राप्ति में दर्ज की गई जिसमें NFHS-6 के अनुसार, 15-49 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं का अनुपात बढ़कर 46.4% हो गया, जिन्होंने 10 या उससे अधिक वर्षों तक स्कूली शिक्षा प्राप्त की है।

पुरुषों में यह आंकड़ा 50.2% से बढ़कर 54.6% हो गया, जो दोनों लिंगों में शिक्षा प्राप्ति के व्यापक विस्तार का संकेत देता है।

दो से चार साल के बच्चों में प्री-स्कूल में उपस्थिति का 40.1% से बढ़कर 47% होना आंगनवाड़ी से जुड़े प्री-प्राइमरी सिस्टम और बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। शहरी क्षेत्रों में प्री-स्कूल में उपस्थिति 50% रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह भागीदारी 46% तक पहुंच गई।

डिजिटल पहुंच की बात करें तो जहां NFHS-6 में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं का प्रतिशत लगभग दोगुना होकर 64.3% हो गया वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 51.2% से बढ़कर 80.5% हो गया। हालांकि, शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिला।

क्या अंतर देखने को मिला?

जहां 77.3% शहरी महिलाओं ने इंटरनेट इस्तेमाल की बात कही, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा घटकर 58.6% रह गया। मोबाइल फोन की उपलब्धता में भी ऐसा ही पैटर्न देखने को मिला।

राष्ट्रीय स्तर पर 63.6% महिलाओं ने बताया कि उनके पास अपना मोबाइल फोन है जिसका इस्तेमाल वे खुद करती हैं लेकिन ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा तेजी से गिरकर 57.4% पर आ गया, जबकि शहरी इलाकों में यह 77.6% था।

सर्वेक्षण में और क्या पता चला?

ये निष्कर्ष ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाते हैं जब सरकारें क्लासरूम टीचिंग, कौशल विकास, ऑनलाइन लर्निंग, स्कॉलरशिप वितरण और शिक्षा से जुड़ी कल्याणकारी सेवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी निर्भरता लगातार बढ़ा रही हैं।

सर्वेक्षण से पता चलता है कि जहां एक ओर भारत तेजी से डिजिटल रूप से जुड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर डिवाइस, कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करना अब शिक्षा नीति के क्षेत्र में अगली बड़ी चुनौती के रूप में उभर सकता है।

NFHS-6 के नतीजे उन बड़े जनसांख्यिकीय बदलावों को भी दिखाते हैं जो भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को आकार दे सकते हैं। 15 साल से कम उम्र की आबादी का हिस्सा NFHS-5 के 26.5% से घटकर 25.5% हो गया, जबकि पांच साल से कम उम्र की आबादी थोड़ी कम होकर 8.2% से 8% रह गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये रुझान आखिरकार भविष्य में स्कूलों में दाखिले के तरीकों, शिक्षकों की मांग और शिक्षा के बुनियादी ढांचे की योजना को प्रभावित कर सकते हैं।

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