भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से आश्विन माह का आरंभ होता है और इसी के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। यह अवधि पितरों को प्रसन्न करने के लिए अधिक शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा अर्पित जल व अन्न से तृप्त होते हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 27 सितंबर से आश्विन माह की शुरुआत हुई है, जिसका समापन 26 अक्टूबर को होगा। इस दौरान कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाएंगे। यदि आप भी पितृ पक्ष और आश्विन माह में पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए नियमों व उपायों का पालन अवश्य करें।
पितरों को प्रसन्न करने के मुख्य उपाय
विधि-विधान से तर्पण
पितृ पक्ष में प्रातःकाल स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करके पितरों का तर्पण करना चाहिए। ध्यान रहे कि शास्त्रों में कुशा घास के बिना किया गया तर्पण अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि तर्पण करने से पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
पंचबलि श्राद्ध का महत्व
पितृ पक्ष में पंचबलि श्राद्ध का विशेष महत्व है। श्राद्ध कर्म के दौरान भोजन में से 5 हिस्से अवश्य निकालें गाय, कुत्ते, कौए, देवादि (अग्नि) और चींटी के लिए। मान्यता है कि इस उपाय को सच्चे मन से करने पर पितरों की आत्मा को असीम तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद बना रहता है।
कुतुप मुहूर्त में पिंडदान और श्राद्ध
पूर्वजों की पुण्य तिथि पर पूरे विधि-विधान से पिंडदान और श्राद्ध कर्म करें। श्राद्ध कर्म करने के लिए दोपहर का कुतुप मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। इससे पितृ प्रसन्न होकर जीवन में शुभ फलों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
ब्राह्मण भोजन और दान
श्राद्ध तिथि पर सात्विक ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्यानुसार तिल, वस्त्र, अन्न, गुड़ या दक्षिणा का दान करें। पितृ पक्ष में काले तिल और गुप्त दान का विशेष महत्व होता है।
दक्षिण दिशा में दीपक प्रज्वलित करें
प्रतिदिन सायंकाल घर की दक्षिण दिशा में पितरों के नाम से सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
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