अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने सोशल मीडिया से वह पोस्ट हटा दी जिसमें भारत का नक्शा दिखाते हुए पूरा जम्मू-कश्मीर, पीओजेके और अक्साई चिन भारत का हिस्सा दर्शाया गया था। यह पोस्ट भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते की जानकारी के साथ डाली गई थी।
भारत के नक्शे को लेकर अमेरिका के सरकारी ट्रेड दफ्तर की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में थी। उसे अब हटा दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय यानी यूएसटीआर ने वह पोस्ट डिलीट कर दी। इसमें भारत का नक्शा दिखाया गया था और उसमें पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दर्शाया गया था। पोस्ट हटने के बाद इस कदम को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
यह पोस्ट उस समय डाली गई थी जब अमेरिका और भारत ने द्विपक्षीय अंतरिम व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे की घोषणा की थी। यूएसटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्रेड डील की जानकारी साझा करते हुए भारत का नक्शा भी लगाया था। इस नक्शे में जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र, जिसमें पीओजेके भी शामिल है, भारत के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया था। साथ ही अक्साई चिन, जिस पर चीन दावा करता है, उसे भी भारत का हिस्सा दर्शाया गया था।
पोस्ट में नक्शे को लेकर क्या था खास?
यूएसटीआर द्वारा साझा नक्शे में भारत की सीमाएं बिना किसी अलग रेखा या विवाद चिन्ह के दिखाई गई थीं। पहले कई अंतरराष्ट्रीय नक्शों में पीओजेके और अक्साई चिन को अलग लाइन या डिस्प्यूटेड एरिया के रूप में दिखाया जाता रहा है। लेकिन इस पोस्ट में पूरा क्षेत्र सीधे भारत की सीमा के भीतर दिखाया गया। यही बात इसे खास और संवेदनशील बनाती है। बाद में यही पोस्ट यूएसटीआर के आधिकारिक एक्स हैंडल से हटा दी गई।
पहले कैसे दिखाए जाते रहे हैं ये क्षेत्र?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी कई नक्शों में पीओजेके और अक्साई चिन को अलग तरह से चिह्नित किया जाता रहा है। कई जगह इन्हें विवादित क्षेत्र बताने के लिए डैश लाइन या अलग रंग का इस्तेमाल होता है। यूएसटीआर के नक्शे में ऐसा कोई अलग निशान नहीं था। नक्शा इस तरह दिखाया गया था जैसे पूरा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र बिना विवाद के भारत का हिस्सा हो। यही वजह है कि पोस्ट ने ध्यान खींचा।
भारत का रुख क्या कहता है?
नई दिल्ली लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत का यह भी कहना है कि अक्साई चिन भी उसके क्षेत्र का हिस्सा है और यह दावा ऐतिहासिक आधार और पुराने समझौतों पर टिका है। भारत ने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यह रुख दोहराया है।
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