दीपोत्सव मेला अयोध्या में राज्य मेला का दर्जा…

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में सम्पन्न उत्तर प्रदेश की कैबिनेट की बैठक में कुल 13 निर्णय पर मुहर लगी। इनमें अयोध्या में दीपोत्सव मेला को राज्य मेला का दर्जा तथा फिल्म सांड की आंख को टैक्स फ्री करना भी शामिल है।

बीते दो हफ्ते सीएम योगी आदित्यनाथ की व्यस्तता के कारण नहीं हो सकी थी। लोकभवन में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। अयोध्या में दीपोत्सव मेला को राज्य मेला का दर्जा दिया गया। मेले के तहत झांकी सहित सभी कार्यक्रमों का ऑडिट किया जाएगा। सरकार इस मेले को हर साल धूमधाम से आयोजित करती है।

राज्य मेला का दर्जा मिलने के बाद मेले पर आने वाला पूरा खर्च सरकार उठाएगी। अब बजट में इसकी अलग से व्यवस्था होगी। इससे पहले मीरजापुर के विंध्याचल शक्ति पीठ, नैमिषारण्य का मां ललिता देवी व देवीपाटन का पाटेश्वरी शक्ति पीठ मेला को भी प्रदेश सरकार राज्य मेला का दर्जा दे चुकी है। प्रांतीयकरण होने के बाद प्रदेश सरकार मेले के लिए बजट की व्यवस्था कर सकेगी। इससे यहां श्रद्धालुओं को भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

कैबिनेट बैठक में पेयजल के लिए अमृत योजना के तहत रायबरेली योजना फेज-तीन को मंजूरी दी गई। इसके लिए 187.17 करोड़ रुपया का का अनुमोदन किया गया है। जिसमें 50 प्रतिशत केंद्र, 30 प्रतिशत राज्य सरकार और 20 प्रतिशत प्रदेश का नगरीय निकाय देगा। रायबरेली में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में पास किया गया।

इसके साथ यूपी स्टेट सेप्टेज मैनेजमेंट पॉलिसी मंजूर की गई। प्रदेश में 652 नगर निकायों में 5 करोड़ आबादी है। अपशिष्ट जल प्रबंधन की 3300 एमएलडी क्षमता अभी है और 1280 एमएलडी की क्षमता विकसित की जा रही है। इन निकायों के भीतर 72 लाख ऑन साइट कलेक्शन होता है जिसमे 5560 एमएलडी कलेक्शन आता है।

इसके लिये ट्रेनिंग, सुरक्षा आदि व्यवस्था की जाएगी। सफाई कर्मियों की सुरक्षा के सभी कदम उठाए जाएंगे। 2019 तक सभी प्रारंभिक व्यवस्था, 2021 तक सभी निकाय पॉलिसी से जोड़ेंगे और 2023 तक इसे पूरी तरह लागू हो जाएगी। केंद्र, राज्य, निकाय और सीएसआर से व्यवस्था फण्ड की की जाएगी। 2023 के बाद उपभोक्ता पर सरचार्ज लगाकर सभी खर्च निकाले जाएंगे। इसके जरिये सरकार शहरों में सेप्टेज प्रबंधन करेगी।

जिनके घरों में सेप्टिक टैंक बने हैं उन्हें पांच वर्ष में 2500 रुपये या हर साल 500 रुपये का शुल्क देना होगा। बड़े या छोटे शहरों के हिसाब से यह शुल्क कम या ज्यादा हो सकता है। इसके जरिये सरकार प्रदेश में बने करीब 72 लाख सेप्टिक टैंकों का प्रबंधन करेगी। इन्हें अभियान चलाकर 2023 तक साफ कराया जाएगा। इसके बाद हर पांच साल इसकी नियमित सफाई करानी होगी।

सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के शिक्षकों को सातवें वेतनमान की मंजूरी दी गई। इससे एकेटीयू, मदनमोहन इंजीनियरिंग विवि और एचबीटीआई के कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। यह लागू करने पर 47.14 करोड़ खर्च आएगा।

यूपी एडेड टेक्निकल इंस्टीट्यूट नियमावली में बदलाव किया गया है। चयन समिति में परिवर्तन किया गया है। प्रधानाचार्य की चयन समिति में उप शिक्षा सलाहकार की जगह एआईसीटीई का प्रतिनिधि शामिल होगा।

कैबिनेट ने विशेष सत्र के सत्रावसान को मंजूरी दी। प्रदेश सरकार ने संकल्प पारित किया कि गांधी के आदर्शों पर चलते हुए सयुंक्त राष्ट्र के तय एसडीजी गोल को प्राप्त करने के लिये प्रभावी कदम उठाएंगे।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में लाहौरी टोला के निर्मल मठ के भवन खरीद को मंजूरी दी गई। निर्मल मठ के भवन को इसके तहत कॉरिडोर के निकट 500 वर्ग मीटर की जमीन दी जाएगी।

यूपी मात्स्यिकी नियमावली में बदलाव को हरी झंडी दी गई। इसके तहत बोर्ड और कोष गठित किया गया है। कृषि उत्पादन आयुक्त अध्यक्ष होंगे। मछुआ समुदाय के विकास और सहयोग के लिये मदद की जाएगी। 100 करोड़ के कोष के साथ मत्स्य पालन विकास समिति का लक्ष्य है। अभी 25 करोड़ का बजट स्वीकृति की गई है।

कैबिनेट की मंजूरी से खनन विभाग में समूह क और ख की नियमावली आएगी। इसमें आरक्षण, आयु सीमा, प्रमोशन, वरिष्ठता आदि के वर्तमान सन्दर्भो को शामिल किया जाएगा।

राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कर्मचारियों के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कमिटी गठित की गई। 15 दिन में रिपोर्ट देगी जिसमें समायोजन, वीआरएस, निगम बन्द करने या चलाने सहित सभी पहलुओं पर विचार करेगी।

सोनभद्र में जेपी सीमेंट के खनन क्षेत्र के लिये वन भूमि 586.178 हेक्टयर की अधिसूचना निरस्त कर 470.304 हेक्टयर गैर वन भूमि कृषि के लिये दी जाएगी। मडिहान से भूमि इसके लिये अधिग्रहित की जाएगी। जमीन का 4 गुना मूल्य, पौधरोपण से आने वाला खर्च वहन करने के बाद फैक्ट्री शुरू हो सकेगी।

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