सिर्फ फेफड़े नहीं, जहरीली हवा आपकी किडनी को भी कर रही है डैमेज!

वायु प्रदूषण बढ़ने की वजह से हमारे फेफड़ों को होने वाले नुकसान से हम सभी वाकिफ हैं, लेकिन पॉल्यूशन हमारी किडनी के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है। हाल ही में सामने आई स्टडीज में पता चला है कि प्रदूषित हवा क्रॉनिक किडनी डिजीज के बढ़ने की गति को और तेज कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि बढ़ते प्रदूषण में किडनी की बीमारी के मरीज ज्यादा सावधानी बरतें और बचाव के लिए कुछ खास सावधानियों को ध्यान में रखें।

प्रदूषण किडनी पर कैसे डालता है बुरा असर?

क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों की किडनी पहले ही कमजोर होती है। ऐसे में वायु प्रदूषण उन पर और ज्यादा दबाव डालता है। हवा में मौजूद PM2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और दूसरे प्रदूषक फेफड़ों के जरिए सीधे हमारे खून में मिल जाते हैं। इसके कारण शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है। इसलिए किडनी डिजीज के कारण किडनी में मौजूद सूजन और तेजी से बढ़ती है और इसकी वजह से क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या और तेजी से बढ़ सकती है। इसके अलावा, किडनी के मरीजों में निमोनिया का खतरा भी बढ़ जाता है। वायु प्रदूषण हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों को भी बदतर बना सकता है, जो किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले रिस्क फैक्टर्स हैं। किडनी के मरीज शरीर में फ्लूएड और इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस भी ठीक से नहीं बनाए रख पाते हैं, जिसके कारण उनकी सेहत का ज्यादा ध्यान रखना और भी जरूरी है। किडनी के मरीज बरतें ये सावधानियां अपने आस-पास की हवा के प्रदूषण का स्तर चेक करते रहें और जब प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा हो, तब बाहर निकलने से बचें। बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क लगाएं, ताकि हवा में मौजूद बारीक प्रदूषक फेफड़ों में न जाएं। घर के अंदर की हवा को भी साफ रखना जरूरी है। ज्यादा प्रदूषण के दौरान खिड़कियों को बंद रखें, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और तंबाकू के धुएं जैसे इंडोर प्रदूषण से दूर रहें। दवाओं और रूटीन का खास ध्यान अपनी दवाइयों को नियमित रूप से लेते रहें, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर पर नजर रखें। साथ ही, समय-समय पर किडनी की जांच भी करवाते रहें। डॉक्टर की बताई पानी की मात्रा का ध्यान रखें और उतनी मात्रा में पानी जरूर पिएं। हालांकि, आप दिन में कितना पानी पी रहे हैं, इसकी सलाह डॉक्टर से लें, क्योंकि कुछ किडनी के मरीजों को फ्लूएड रिस्ट्रिक्शन की भी जरूरत होती है। खुद से दवाएं लेने या बिना डॉक्टर से पूछे किसी भी डिटॉक्स प्रोडक्ट के इस्तेमाल से पूरी तरह बचें। इसके अलावा, प्रदूषण में घर से बाहर कम से कम निकलें, नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं और डॉक्टर की बताई सभी सलाहों को जरूर फॉलो करें।

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