अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिकी सेना ईरान पर दोबारा हवाई हमले शुरू कर सकती है।
यदि संघर्ष फिर से भड़कता है, तो अमेरिकी कमांडरों के पास पर्याप्त सैन्य विकल्प रहें, इसके लिए ट्रंप ने फारस की खाड़ी में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और लगभग 10000 अतिरिक्त नौसैनिक और मरीन जवान तैनात कर दिए हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का इजरायल दौरे के बीच खाड़ी में बढ़ता तनाव
बीते सप्ताह अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बिना किसी पूर्व सूचना के इजरायल का दौरा किया। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए अहम आम चुनावों से ठीक पहले हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक चर्चा हुई।
ज्ञात हो कि अमेरिका के साथ मिलकर इजरायल ने ही ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की शुरुआत की थी। इस बीच, ईरानी हमलों की जद में आए मध्य पूर्व के कई अमेरिकी सैन्य अड्डों पर कर्मियों की संख्या में कटौती की गई है।
उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब में किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने रियाद स्थित राजनयिकों और उनके परिवारों को वहां से निकलने का आदेश दिया है। हूतियों द्वारा रियाद हवाई अड्डे और ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।
युद्ध छिड़ा तो भी नहीं बदलेगी नीति: ईरान
दूसरी ओर, ईरान भी चुनाव के आसपास संभावित अमेरिकी बमबारी से निपटने और पूरे पश्चिम एशिया में जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव और जनवरी में नई कांग्रेस के शपथ ग्रहण के बीच का समय सबसे तनावपूर्ण साबित हो सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ दोबारा युद्ध शुरू होने पर भी उनके देश का रुख नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में नए युद्ध की बातें हो रही हैं, लेकिन मैं युद्ध के बाद के दौर के बारे में सोच रहा हूं।
युद्ध हो या न हो, हमारी नीतियां समान रहेंगी। वे पहले भी दो बार कोशिश कर चुके हैं और नतीजा देख चुके हैं, अगर वे दोबारा प्रयास करेंगे, तो परिणाम पहले से अलग नहीं होगा। अराघची ने दोहराया कि मौजूदा संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता ऐसा समझौता है, जिसमें दोनों पक्ष अपनी जीत का दावा कर सकें।
होर्मुज में जहाजों पर बढ़े हमले
खाड़ी देशों के अधिकारियों को आशंका है कि संघर्ष विराम टूटने के बाद हालात पहले से भी बदतर हो सकते हैं। ट्रंप ने भी संवाददाताओं से कहा कि हमने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है, और जरूरत पड़ने पर हम इसे थोड़ा और आगे ले जा सकते हैं।
इस बीच, समुद्री सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ईरान होर्मुज के पास ड्रोन के बजाय गाइडेड मिसाइलों से व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहा है, जिससे पहले की तुलना में कहीं अधिक नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोबारा युद्ध शुरू होने से नेतन्याहू को इजरायल में राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने में मदद मिल सकती है, जबकि ट्रंप को घरेलू राजनीति में अपना कड़ा नेतृत्व दिखाने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के विशेषज्ञ अली वाएज ने आगाह किया कि दोनों नेता ईरान के साथ युद्ध को अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने के साधन के रूप में देख रहे हैं, लेकिन यह जोखिम भरा दांव उनकी राजनीतिक संभावनाओं को बचाने के बजाय उन्हें गहरे संकट में भी धकेल सकता है।
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