कैंसर के इलाज में सस्ती ‘इम्यूनोथेरेपी’ दवा आने से मरीजों को राहत
October 25, 2026
राष्ट्रीय
भारत में कैंसर के इलाज को लेकर एक बहुत बड़ी और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई है। पिछले छह महीनों में देश के अधिक से अधिक कैंसर मरीजों को ‘इम्यूनोथेरेपी’ लिखी जा रही है। आधुनिक कैंसर चिकित्सा का यह एक बेहद प्रभावी तरीका है, जो अब तक अपनी आसमान छूती कीमतों के कारण आम मरीजों की पहुंच से बाहर था।
हालांकि यह बदलाव मुख्य रूप से ‘निवोलुमब’ नामक एक प्रमुख इम्यूनोथेरेपी दवा के सस्ते वर्जन बायोसिमिलर के बाजार में आने की वजह से संभव हुआ है। टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के डॉक्टरों के मुताबिक, यह दवा लगभग 25 प्रकार के ट्यूमर और करीब 100 तरह के कैंसर में प्रभावी है।
तो ऐसे कम हो सकेगा इलाज का खर्च कम
इसके अलावा, भारतीय शोध ने यह भी दिखाया है कि कुछ मामलों में कम खुराक भी भारतीय मरीजों पर बेहतरीन असर दिखाती है, जिससे इलाज का खर्च और कम हो सकता है। अंधेरी के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. इमरान शेख का कहना है कि सस्ती दवा आने के बाद पिछले छह महीनों में उनके द्वारा लिखी जाने वाली इन प्रिस्क्रिप्शंस में 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
डॉ. शेख का कहना है कि जिन मरीजों को एक लाख रुपये से ज्यादा का एक साइकिल खर्च उठाने में संकोच होता था, वे अब 30000 रुपये की नई कीमत पर इलाज कराने में सहज हैं।
इलाज की पहुंच में अंतर
बता दें कि साल 2022 के एक TMC अध्ययन के अनुसार, तब इम्यूनोथेरेपी के योग्य कुल मरीजों में से मात्र 2.8% को ही यह इलाज मिल पा रहा था। लेकिन अब इसमें भारी उछाल आया है।
जानलेवा बीमारियों पर असर
टाटा मेमोरियल अस्पताल (परेल) के मेडिकल ओंकोलॉजी हेड डॉ. कुमार प्रभास के अनुसार, स्किन कैंसर जैसे मामलों में पहले जहां 100 में से बमुश्किल 5 मरीज ही लंबे समय तक जीवित बच पाते थे, वहीं अब इम्यूनोथेरेपी के बाद यह जीवित रहने की दर बढ़कर 50% तक हो गई है।
इसके अलावा, एडवांस फेफड़ों के कैंसर के मरीज भी अब 5 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं। कोलन कैंसर के शुरुआती मामलों में अब कीमोथेरेपी और सर्जरी के बिना केवल इम्यूनोथेरेपी से ही मरीज का प्राकृतिक अंग सुरक्षित रखते हुए इलाज संभव हो पा रहा है।
अभी भी चुनौतियां बाकी
हालांकि इस मामले में अभी भी मरीजों के लिए कुछ चुनौतियां बनी हुई है। चुनौती यह है कि क्या मरीजों को पूरा फायदा मिल पाएगा? इस बात के जवाब में डॉ. शेख का कहना है कि भारत में अभी केवल 7 चेकपॉइंट इनहिबिटर दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि चीन में इनकी संख्या 35 है। बाकी छह दवाएं आज भी आयात की जाती हैं और उनका कोर्स लाखों में पड़ता है।
हस्पतालों के मुनाफे का पेंच
दूसरी तरफ नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा 8 नवंबर से 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप करने से सालाना 2500 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद है।
हालांकि, थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क के के.एम. गोपीकुमार का मानना है कि जो अस्पताल अपने खुद के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने की शर्त रखते हैं, वे ज्यादा मुनाफे के चक्कर में सस्ती दवाओं की बजाय महंगी ओरिजिनल दवाएं ही स्टॉक कर सकते हैं।
और कम हो सकती है कीमत
बड़ी बात यह भी है कि आने वाले समय में निवोलुमब के चार और वर्जन बाजार में आने वाले हैं, जिससे इसकी कीमत 30000 से गिरकर 10000 रुपये तक आ सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कम मार्جिन वाली दवाओं को अपने यहां रखते हैं या नहीं।
2026-10-25