मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगले छह महीनों में उत्तर प्रदेश के एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और मेरिट आधारित बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने आयोगों और भर्ती बोर्डों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर काम करने की आवश्यकता बताई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के अध्यक्षों एवं सदस्यों को भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोग यदि राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर कार्य करें और परीक्षाएं पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण तरीके से आयोजित हों, तो युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर अवसर मिलता है। कहा कि अगले छह महीने में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार में भर्ती प्रक्रिया के हर चरण की निगरानी की जा रही है। विज्ञापन जारी होने से लेकर परीक्षा, परिणाम घोषित होने और नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने तक पूरी प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भर्ती में मेरिट और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि अभ्यर्थियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
पिछली सरकारों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की सरकारों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय आयोगों और भर्ती बोर्डों में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के कारण भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई थी। उनके अनुसार, उस दौर में युवाओं के बीच नौकरी के लिए प्रदेश से बाहर जाने की मजबूरी का भाव पैदा हुआ।
2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों में न पेयजल की व्यवस्था थी, न शौचालय और न गर्म भोजन की। 2017 में सरकार बनने के बाद जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की तो पूरा तंत्र बदहाल मिला। पोषाहार की गुणवत्ता पर सवाल थे। वितरण की कोई नियमित व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद व्यवस्था में बदलाव शुरू किया गया। पिछले साढ़े नौ वर्षों में 70 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को नया स्वरूप दिया गया है।
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