विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना हादसे के बाद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। परियोजना से जुड़े विस्थापन, निर्माण और सुरक्षा को लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं। सुरंग हादसे ने इन पुराने विवादों और सुरक्षा व्यवस्था को फिर चर्चा में ला दिया है।
टीएचडीसी की 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना शुरुआत से ही विवादों में रही है। परियोजना निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों पर प्रभाव को लेकर ग्रामीण विरोध जताते रहे हैं। कुछ प्रभावित परिवार आज भी न्यायालय की शरण में हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना निर्माण में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया और पर्यावरणीय पहलुओं की अनदेखी हुई। वर्ष 2009 में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने पर स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उनकी आपत्तियों को महत्व नहीं दिया गया। वर्ष 2011 में हाट गांव के करीब 140 परिवारों को विस्थापित किया गया।
विस्थापन और भूमि अधिग्रहण के विरोध में ग्रामीणों ने कई आंदोलन किए। हाट गांव के ग्रामीणों ने 2012, 2014 और 2019 में भी आंदोलन किए। कंपनी प्रबंधन ने आंदोलनों के बाद ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए। प्रभावित परिवारों को इन मामलों में न्यायालय से राहत मिली।
सुरक्षा पर उठे सवाल
हाट गांव के पूर्व ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल और पूर्व ज्येष्ठ उपप्रमुख पंकज हटवाल ने सुरक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे वाली टनल में पहले भी मलबा गिरने की घटनाएं हुई हैं। कंपनी प्रबंधन ने इन घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया। पिछले वर्ष हुए लोको ट्रॉली हादसे से भी सबक नहीं लिया गया। उन्होंने हादसे की स्वतंत्र समिति से जांच और प्रभावित परिवारों की चिंता की मांग की।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal