दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फ़ूड रेगुलेटर FSSAI के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाने वाले तेल जैसे प्रोडक्ट ‘100 प्रतिशत’ होने के दावे के साथ बेचने से रोका गया था। जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि डाबर लंबे समय से ये प्रोडक्ट बेच रही है और राहत देने के लिए शुरुआती तौर पर मामला बनता है, क्योंकि फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) ने आदेश जारी करने से पहले कंपनी को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया था।
जस्टिस महाजन ने कहा, “कोर्ट की शुरुआती राय है कि पाबंदी लगाने वाला आदेश सुनवाई का मौका दिए बिना जारी नहीं किया जाना चाहिए था। विवादित आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगी रहेगी।”
इसके अलावा, हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई दो हफ़्ते बाद के लिए तय की है। डाबर की तरफ़ से पेश हुए सीनियर वकील ने दलील दी कि FSSAI का आदेश बिना किसी ‘शो-कॉज़ नोटिस’ या सुनवाई के जारी किया गया था, जिससे ‘नैचुरल जस्टिस’ (प्राकृतिक न्याय) के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। वहीं, केंद्र सरकार के वकील ने फ़ूड रेगुलेटर के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि कंपनी को पहले भी ‘सुधार नोटिस’ और एडवाइज़री जारी की गई थीं और उसके उत्पादों के बारे में किया गया ‘100 प्रतिशत’ का दावा गुमराह करने वाला था।
सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, FSSAI ने बताया कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का आदेश दिया है जिन पर “100 प्रतिशत” जैसे गुमराह करने वाले दावे किए गए हैं। इन प्रोडक्ट्स में शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल का दूध शामिल हैं।
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