गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को रामनगरी आस्था और श्रद्धा से सराबोर रही। भोर से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से पुण्य स्नान किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीरामजन्मभूमि सहित हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ, जहां शिष्यों ने अपने गुरुजनों का सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरु पूर्णिमा के चलते मंदिरों और घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन के जवान प्रमुख स्थलों पर तैनात रहे व श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। आज यह स्नान पूरे दिन चलता रहेगा।
प्रदेश में गुरु परंपरा स्थलों का तेजी से हो रहा पर्यटन विकास
प्रदेश सरकार गुरु परंपरा से जुड़े स्थलों के संरक्षण और विकास पर जोर दे रही है। आध्यात्मिक पर्यटन विकास के माध्यम से मंदिरों, आश्रमों और गुरुद्वारों को संवारा जा रहा है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करना और नई पीढ़ी को अपनी ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।
प्रदेश में महर्षि वेदव्यास, संत रविदास और गुरु गोरक्षनाथ जैसी विभूतियों ने भारतीय संस्कृति को दिशा दी। महोबा में गोरखगिरि पर्वत पर 11.25 करोड़ की लागत से 51 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। अमेठी के जायस में 5.95 करोड़ से 25 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की योग मुद्रा वाली कांस्य प्रतिमा का निर्माण हो रहा है।
इसी तरह वाराणसी में संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धन धाम के पुनर्विकास पर 51.54 करोड़ खर्च किए गए हैं। देवरिया में ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास पर 2.50 करोड़ की परियोजना चल रही है। हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर स्थित गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा के पर्यटन विकास के लिए 3.63 करोड़ स्वीकृत किए हैं। मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ स्थित रविदास मंदिर के लिए 229.57 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई है।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा गुरु परंपरा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति कृतज्ञता का अवसर है। प्रदेश सरकार संतों, ऋषियों और गुरुओं से जुड़े स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal