महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ मारपीट करने वाले शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद किए जाने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है।
जमानत रद करते हुए अदालत ने म्हात्रे को रविवार शाम 5 बजे तक हर हाल में सरेंडर करने का सख्त आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने पुलिस के समक्ष पेश होकर खुद को कानून के हवाले कर दिया।
हाईकोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ कर रही थी। खंडपीठ ने कल्याण मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि निचली अदालत ने आरोपी के आपराधिक इतिहास को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
म्हात्रे पर पहले भी हत्या और हत्या के प्रयास सहित 18 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जिसे जमानत देते समय ध्यान में नहीं रखा गया।
आपराधिक रिकॉर्ड पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
जमानत रद करते हुए हाईकोर्ट की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही आरोपी म्हात्रे को 17 मामलों में बरी कर दिया गया हो, लेकिन अदालत को इस तथ्य पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था कि उसके नाम 18 मामले दर्ज थे। इनमें से कई मामले बेहद गंभीर और जघन्य प्रकृति के थे, जो जमानत के फैसले को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त हैं।
इस हिंसक घटना के बाद डॉक्टरों में पनपे भारी रोष को देखते हुए अदालत ने भी हस्तक्षेप किया है। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों से अपील की है कि वे मारपीट की इस घटना के विरोध में 20 जुलाई को प्रस्तावित अपनी हड़ताल के फैसले पर एक बार फिर से विचार करें ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
आईएमए ने किया है 24 घंटे के बंद का ऐलान
गौरतलब है कि महिला डॉक्टर पर हुए इस हमले के बाद देश के सबसे बड़े चिकित्सा निकाय, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है।
आईएमए ने महाराष्ट्र के सभी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं को 24 घंटे के लिए पूरी तरह बंद रखने की घोषणा की है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
क्या था मामला?
6 जुलाई को ठाणे के एक अस्पताल में म्हात्रे घुस गए और दो डॉक्टरों के साथ मारपीट की। मारपीट तब हुई जब डॉक्टरों ने NICU में जगह न होने की वजह से एक नवजात शिशु को भर्ती करने से मना कर दिया था।
उन्होंने न तो अफसोस जताया और न ही माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि वह बस एक महिला और उसके बच्चे की मदद कर रहे थे।
कॉर्पोरेटर ने कहा कि मैंने अस्पताल में महिला डॉक्टर पर हमला नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने डॉक्टर का फ़ोन हटवाने के लिए बस उनके हाथ पर मारा था। उन्होंने कहा कि मैंने उनका फ़ोन इसलिए हटाया क्योंकि वह हमारी बात नहीं सुन रही थीं।
मैंने बस उन्हें फोन से हटाने की कोशिश की थी। कॉर्पोरेटर को 8 जुलाई को गिरफ़्तार किया गया और 14 जुलाई को उन्हें ज़मानत मिल गई।
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