अमेरिकी सीनेटरों ने मंगलवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक का संशोधित संस्करण पेश किया है। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित इस विधेयक में मूल प्रस्ताव की तुलना में भारत, चीन और रूसी तेल एवं गैस का आयात करने वाले अन्य देशों पर लगाए जाने वाले भारी टैरिफ के खतरे को काफी कम कर दिया गया है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के समर्थन वाले इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना और टैरिफ के जरिए चीन व भारत पर दबाव बनाना है ताकि वे ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस पर अपनी निर्भरता कम करें।
भारत और चीन के लिए टैरिफ नियमों में ढील
नए संशोधित विधेयक में उन तीसरे देशों को बड़ी राहत दी गई है जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीदारी करते हैं। अप्रैल 2025 में पेश किए गए मूल प्रस्ताव में रूसी ईंधन खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत का एकमुश्त भारी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, ट्रंप सरकार ने जिसे अब बदलकर शीर्ष पांच खरीदारों के लिए अधिकतम 100 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।
सीनेट के सहयोगियों के अनुसार, रूसी कच्चे तेल के शीर्ष पांच खरीदारों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं, जबकि प्राकृतिक गैस के शीर्ष खरीदारों में चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का नाम है।
इसके साथ ही, नए विधेयक में उन देशों के लिए एक विशेष छूट का प्रावधान भी जोड़ा गया है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम हिस्सा आयात करते हैं और अपनी इस निर्भरता को कम करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रहे हैं।
इस नए नियम के तहत जापान, फ्रांस, हंगरी और बेल्जियम जैसे देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जिससे इन देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
रूस के शैडो फ्लीट पर शिकंजा
यह विधेयक सीधे तौर पर रूस की अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े स्रोतों को लक्षित करता है। इसके तहत रूस के तेल टैंकरों के उस शैडो फ्लीट यानी गुप्त बेड़े पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो पश्चिमी समुद्री सेवाओं पर निर्भर नहीं हैं और वैश्विक प्रतिबंधों से बचने के लिए तेल का परिवहन करते हैं।
इसके अलावा, रूसी वित्तीय क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने के लिए रूसी संघ के केंद्रीय बैंक सहित कई अन्य बड़े वित्तीय संस्थानों को भी इस प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र को आर्थिक चोट पहुंचाने के लिए रूस की सबसे बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली ऊर्जा परियोजनाओं को भी इस विधेयक में शामिल किया गया है, जिनमें यामल एलएनजी और आर्कटिक एलएनजी 1, 2 और 3 जैसी मेगा परियोजनाएं प्रमुख हैं।
हालांकि, इन कड़े प्रावधानों के बीच नए संस्करण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को एक विशेष विवेकाधिकार भी दिया गया है, जिसके तहत यदि उन्हें लगता है कि यह अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वह इन प्रतिबंधों को पूरी तरह से या आंशिक रूप से माफ कर सकते हैं।
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