हिंदू धर्म में सावन महीने का खास महत्व होता है। भगवान शिव को समर्पित इस महीने के दौरान चारों तरफ शिव मंदिरों से आती घंटियों की गूंज और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे सुनाई देते हैं। हिंदू कैलेंडर के इस महीने की बात सबसे अलग होती है।
यह वह मौका होता है, जब प्रकृति हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़ती है और आस्था और भक्ति का सबसे पावन महीना आता है। यह महीना भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय है। इस पूरे महीने भक्त अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए खास पूजा-अर्चना करते हैं, कांवड़ यात्रा निकालते हैं और घर में सुख-शांति के लिए रुद्राभिषेक करते हैं। तो आइए आज इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कब से शुरू होगा सावन का पावन महीना-
कबसे शुरू होगा सावन का महीना?
इस साल सावन के महीने की शुरुआत बहुत ही शुभ संयोग के साथ हो रही है। पंचांग के अनुसार, सावन महीने के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 जुलाई की रात 8:05 बजे शुरू हो जाएगी, लेकिन उदयातिथि के महत्व को देखते हुए यह पावन महीना गुरुवार, 30 जुलाई से शुरू माना जाएगा।
वहीं, इसका समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि इस बार सावन की शुरुआत ‘आयुष्मान योग’ में हो रही है। मान्यता है कि इस खास योग में की गई पूजा से इंसान को बढ़िया स्वास्थ्य और लंबी उम्र का वरदान मिलता है।
इस महीने आएंगे कई बड़े व्रत-त्योहार
सावन के महीने में आने वाले हर सोमवार का खास महत्व होता है। इस दौरान लोग सावन सोमवार का व्रत रखते हैं और भोलेनाथ की पूरी कृपा पाने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। इसके अलावा कुछ लोग सावन सोमवार से ही ‘सोलह सोमवार’ का व्रत भी शुरू करते हैं।
सोमवार के अलावा, सावन के हर मंगलवार को माता पार्वती को समर्पित ‘मंगला गौरी’ का व्रत रखा जाता है। यह व्रत सुहाग और घर में सुख-समृद्धि के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
कब-कब होंगे सोमवार
पहला सोमवार: 3 अगस्त
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त
तीसरा सोमवार: 17 अगस्त
चौथा सोमवार: 24 अगस्त
मंगला गौरी व्रत की तारीखें
मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त
मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त
मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त
मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त
कैसे करें भोलेनाथ की पूजा?
सावन के सोमवार को सुबह जल्दी उठकर नहा लें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद पास के शिव मंदिर जाएं। सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं।
फिर दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से बना ‘पंचामृत’ अर्पित करें।
भोलेनाथ को सफेद चंदन लगाएं और सफेद फूल, भांग, धतूरा और फल चढ़ाएं।
शिव जी के साथ पूरे शिव परिवार की भी पूजा करें।
अंत में आरती करें और सच्चे मन से “ॐ नमः शिवाय” या “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का जाप करें।
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