नासिक पुलिस ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक यूनिट से जुड़े यौन उत्पीड़न मतांतरण मामले में आरोपितों के खिलाफ शुक्रवार को 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। आरोपितों के खिलाफ कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें से फिलहाल सिर्फ एक मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक की टीम द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पीड़िता के जबरन मतांतरण से संबंधित सुबूतों का पता लगाया है, एक ऐसा कृत्य जिसने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद
पुलिस ने आरोपितों द्वारा पीड़िता का नाम और पहचान बदलने के लिए इस्तेमाल किए गए मूल दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा, पीड़िता और आरोपितों दोनों के मोबाइल फोन से प्राप्त वाट्सएप चैट स्क्रीनशाट के रूप में डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं।
किन लोगों को बनाया गया आरोपी?
आरोपपत्र में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन मजीद पटेल को आरोपित बनाया गया है। इनमें से किसी को भी जमानत नहीं मिली है। आरोपपत्र नासिक रोड स्थित अतिरिक्त सत्र एवं विशेष न्यायालय में दायर की गई।
‘टीसीएस सभी यूनिटों में यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए पैनल गठित करे’
नासिक यौन शोषण मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) कंपनी को निर्देश दिया कि वह अपने सभी 127 यूनिटों में चार सप्ताह के भीतर यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए आंतरिक समितियां गठित करे।
आयोग की प्रमुख विजया राहटकर की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई सुनवाई में कंपनी को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम (पीओएसएच), 2013 पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया।
अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय करते हुए आयोग ने कंपनी को संबंधित अधिकारियों को वार्षिक पीओएसएच रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित करने के लिए कहा और अगली समीक्षा कार्यवाही के दौरान अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी।
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