पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुए ही क्यों किए जाते हैं दान

 सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास का विशेष महत्व है। इस माह में दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस माह में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और दान करने से उसका फल हजार गुना होकर वापस मिलता है। इसके अलावा पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्नान जरूर करना चाहिए। इससे साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है।

पद्म पुराण में एक ऐसे दान के बारे में बताया गया है, जिसका दान पुरुषोत्तम मास में करने से जन्मों-जन्मों के पाप और दरिद्रता की समस्या से छुटकारा मिलता है। इस माह में 33 मालपुए का दान करने का अधिक महत्व है। इस दान को बेहद फलदायी माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरुषोत्तम मास में क्यों किया जाता है 33 मालपुए का दान और क्या है इसका महत्व है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

पुरुषोत्तम मास में क्यों करते हैं मालपुए का दान

पुरुषोत्तम मास के देवता भगवान विष्‍णु हैं। इस महीने में श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्‍णु को मालपुए का भोग अधिक प्रिय है। ऐसे में भगवान विष्‍णु की पूजा के दौरान प्रभु को मालपुए भोग लगाएं। इसके बाद इसे मंदिर या गरीब लोगों में दान करें। इससे साधक को जीवन में कई शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

33 मालपुए ही क्‍यों?
वैदिक शास्त्रों में 33 कोटि देवता माने गए हैं। इसलिए पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुए का दान करने से इन सभी 33 देवों की तृप्ति होती है। पितृ दोष की समस्या से छुटकारा मिलता है और जीवन की दरिद्रता का नाश होता है। मालपुए का दान का कांसे के पात्र में करना शुभ माना जाता है। पुरुषोत्तम मास में मालपुए दान करने का वर्णन पद्म पुराण के अध्याय 30 और अध्याय 31 में देखने को मिलता है।

मिलते हैं ये लाभ
पुरुषोत्तम मास 33 मालपुए का दान करने से जीवन में खुशियों का आगमन होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। अगर आप लंबे समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो पुरुषोत्तम मास 33 मालपुए का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे आर्थिक तंगी में सुधार देखने को मिलता है और धन लाभ के योग बनते हैं।

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