पूजा में कौन-से फल-फूल देवी देवताओं को अर्पित नहीं करना चाहिए? 

सनातन धर्म में पूजा में चढ़ाई जाने वाली प्रत्येक वस्तु का अपना धार्मिक महत्व होता है। हिंदू धर्म में जहां कुछ फल और फूल देवी-देवताओं के लिए प्रिय बताए गए हैं, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिन्हें खासतौर पर देवताओं को अर्पित करने से बचा जाता है।

आइए जानते हैं शास्त्रों में बताए गए वो नियम जो आपकी पूजा को अपवित्र होने से बचाएंगे?

भगवान विष्णु को खंडित चावल अर्पित करना
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उन्हें भूलकर भी अक्षत (खंडित चावल) अर्पित नहीं करना चाहिए। पूजा के दौरान हमेशा साबुत और ताजे अक्षत का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

इसके अलावा विष्णु जी की पूजा के दौरान उन्हें आक और धतूरा चढ़ाना भी वर्जित माना जाता है, क्योंकि ये वस्तुएं धार्मिक नजरिए से देखा जाए तो भगवान शिव से जुड़ी है। इस बात का उल्लेख आपको पद्म पुराण और स्कंद पुराण में देखने को मिल सकता है।

भगवान शिव को केतकी का फूल अर्पित करना अशुभ
भगवान शिव को भूलकर भी केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। दरअसल पौराणिक कथा के मुताबिक, जब ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता विवाद के दौरान केतकी के फूल ने भगवान ब्रह्मा के पक्ष में झूठ गवाही दी थी, तब इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से निषिद्ध कर दिया था। इस बात का उल्लेख शिव पुराण जैसे शास्त्रीय ग्रंथों में देखने को मिलता है।

पूजा में किन चीजों को न चढ़ाएं
भगवान गणेश को तुलसी चढ़ाना अशुभ

हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र माना जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित करना वर्जित माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, तुलसी ने गणेश जी से विवाह का प्रस्ताव रखा था, गणेश जी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

इस बात से नाराज होकर तुलसी ने उन्हें श्राप दिया है और बाद में गणेश जी ने भी तुलसी को अपनी पूजा से निषिद्ध कर दिया। इसका शास्त्रीय संदर्भ ब्रह्मवैवर्त पुराण में है।

देवी दुर्गा को अपवित्र या सढ़ा-गला फल अर्पित करना अशुभ
हिंदू धर्मशास्त्रों में साफ-साफ लिखा है कि, देवी-देवताओं को बासी, पुराना, अपवित्र, कटा या सड़ा हुआ फल अर्पित करना अशुभ माना जाता है।

इस बात का ध्यान रखें कि, पूजा में हमेशा साफ और ताजे फल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इसका शास्त्रीय आधार मनुस्मृति और देवी भागवत पुराण में है।

भगवान सूर्य को बिल्व पत्र चढ़ाना वर्जित
सूर्य देव को बिल्व पत्र चढ़ाना अशुभ। सूर्य पूजा में इसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर करने से बचा जाता है। सूर्य देव को लाल फूल, गुड़, गेहूं और जल अर्पित करना अधिक शुभ माना गया है। भविष्य पुराण ग्रंथ में इसका शास्त्रीय संदर्भ देखने को मिल सकता है।

धार्मिक ग्रंथों में पूजा सामग्री को लेकर साफ-साफ नियम बताए गए हैं। हालांकि अलग-अलग परंपराओं, संप्रदायों और क्षेत्रों में मान्यताओं में थोड़ा-बहुत बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए किसी खास पूजा या व्रत में स्थानीय परंपरा और पंडित की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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