विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और सूरीनाम के संबंध पारिवारिक बंधन पर आधारित हैं। भारत इस देश को दूर का साझेदार नहीं बल्कि परिवार के रूप में देखता है। उन्होंने दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर यह बात कही है।
जयशंकर इस समय जमैका, सूरीनाम व त्रिनिदाद और टोबैगो की नौ दिवसीय यात्रा पर हैं। वह जमैका की यात्रा के बाद बुधवार को सूरीनाम पहुंचे और यहां के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।
‘दोनों देशों के संबंध मजूबत’
सूरीनाम की यात्रा से पहले जयशंकर ने टाइम्स ऑफ सूरीनाम अखबार में लिखा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत और बहुआयामी साझेदारी में बदल गए हैं, जिसमें बुनियादी ढांचा, व्यापार, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और सूरीनाम ने उच्च स्तरीय यात्राओं के जरिये सहयोग को और मजबूत किया है। इसमें 2023 में सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी की भारत यात्रा और उसी वर्ष भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की सूरीनाम यात्रा शामिल है।
‘हिंदी भाष के प्रचार में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका’
जयशंकर ने सूरीनाम में भारत समर्थित परियोजनाओं और खाद्य सुरक्षा में मदद के लिए 425 मीट्रिक टन खाद्य पदार्थ मुहैया कराने का भी जिक्र किया है। उन्होंने यह भी लिखा कि सूरीनाम ने वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह भारत समर्थित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और इंटरनेशल बिग कैट एलायंस जैसी पहलों में भागीदार है।
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