कुंडली में काल सर्प दोष होने पर जातक को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे शांति के लिए अमावस्या तिथि को एक उत्तम दिन माना गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से आपको काल सर्प दोष से राहत मिल सकती है। चलिए जानते हैं कि अमावस्या के दिन आप किसी तरह काल सर्प दोष से राहत पा सकते हैं।
क्या होता है ‘काल सर्प दोष’
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी सातों ग्रह, छाया ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं यानी एक ही तरफ आ जाते हैं, तो इस ग्रह स्थिति को ‘काल सर्प दोष’ कहा जाता है।इसे ज्योतिष में एक चुनौतीपूर्ण योग माना गया है, जो व्यक्ति के बने-बनाए कामों में रुकावटें पैदा करता है और जीवन में संघर्ष को बढ़ा देता है।
मिलते हैं ये संकेत
कुंडली में काल सर्प दोष होने पर व्यक्ति को डरावने सपने आने लगते हैं और एक अज्ञात भय मन में बना रहता है।
डर के कारण अचानक नींद टूट जाना और सपने में सांपों का दिखना भी काल सर्प दोष का संकेत माना जाता है।
कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती और ऐन मौके पर काम बिगड़ जाता है।
घर में लगातार कलह और तनाव की स्थिति बनी रहती है।
इस दोष के कारण अकारण ही लोगों से दुश्मनी होने लग जाती है।
जरूर करें ये काम
अमावस्या के दिन नाग-नागिन का चांदी का जोड़ा जल में प्रवाहित करें।
अमावस्या पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।
भगवान शिव की विधि-विधा से पूजा करें और महामृत्युंज का जप करें।
गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें।
किसी जरूरतमंद को भोजन या अन्न दान करना कालसर्प दोष का प्रभावी उपाय माना जाता है।
दोष से राहत के लिए अमावस्या के दिन गरीबों को काले कंबल आदि दान करें।
यह भी हैं प्रभावी उपाय
काल सर्प दोष से घबराने के स्थान पर इसके निवारण पर जोर देना चाहिए। भगवान शिव की आराधना करना, रुद्राभिषेक करना और राहु-केतु की शांति के उपायों से इसके नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शनिवार के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पित करना और सात परिक्रमा करना भी काल सर्प दोष से राहत पाने का एक बेहतर उपाय है। इसके साथ ही इस दोष से राहत के लिए आप उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर या नासिक में कालसर्प दोष की पूजा करवा सकते हैं।
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