दुनिया में गरीबी का असली विलेन टैक्स चोरी

दुनिया के सबसे अमीर 0.1% लोगों के पास विदेशों में छिपाया गया इतना टैक्स-फ्री धन है, जो दुनिया की आधी आबादी करीब 4.1 अरब लोग की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है। वैश्विक संस्था ऑक्सफैम की नई रिपोर्ट ने दुनिया में बढ़ती असमानता और गरीबी को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक,

टैक्स हेवन में छिपा 3.55 ट्रिलियन डॉलर

ऑक्सफैम के अनुसार, साल 2024 में करीब 3.55 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 295 लाख करोड़ रुपये) की संपत्ति टैक्स हेवन देशों और अनरिपोर्टेड अकाउंट्स में छिपाई गई। यह रकम France की जीडीपी से भी ज्यादा है और दुनिया के 44 सबसे गरीब देशों की कुल अर्थव्यवस्था से दोगुने से अधिक है।

रिपोर्ट बताती है कि इस छिपे हुए धन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ 0.1 प्रतिशत अमीरों के पास है, जो करीब 2.84 ट्रिलियन डॉलर बैठता है। वहीं, इनमें भी सबसे अमीर 0.01 प्रतिशत लोगों के पास करीब आधा यानी 1.77 ट्रिलियन डॉलर जमा है।

ऑक्सफैम के टैक्स विशेषज्ञ क्रिश्चियन हॉलम ने कहा कि पनामा पेपर्स के 10 साल बाद भी अमीर वर्ग टैक्स से बचने के लिए ऑफशोर सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है।

सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ रहा असर

रिपोर्ट के अनुसार, जब अरबपति और करोड़पति टैक्स से बचते हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों और स्कूलों के लिए फंड की कमी होती है, जबकि आम नागरिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ जाता है। इससे सामाजिक असमानता और गहरी होती जा रही है।

हालांकि पिछले कुछ सालों में टैक्स चोरी पर कुछ हद तक नियंत्रण हुआ है, लेकिन समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल साउथ के कई देशों को ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन (AEOI) सिस्टम से बाहर रखा गया है, जिससे वे टैक्स वसूली में पिछड़ रहे हैं।

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