पुलिस ने मृतक मोहन व राजकुमार के भाई मुकेश के बयान पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। ग्रामीण वीरवार दोपहर 12 बजे पीजीआई पहुंच गए थे। परिजनों के बयान दर्ज करने व दूसरे कागजात तैयार करने में समय लगा।
दिल्ली-रोहतक राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित इस्माईला-11बी में फाग पर 50 साल में पहली बार चार चिताएं एक साथ जली हैं। हादसे से गांव में मातम का माहौल है। एक परिवार ने तीन चचेरे भाइयों मोहन, राजकुमार व सोनू को खो दिया। इसमें मोहन व राजकुमार तो सगे भाई थे। चौथा राजेश उर्फ लीलू पड़ोस का ही रहने वाला था।
इस्माईला गांव निवासी व जिला बार के वरिष्ठ वकील शक्ति ने बताया कि उनकी उम्र 50 साल के करीब है। उन्हाेंने कभी ऐसा नहीं सुना कि होली पर्व पर फाग के दिन यूं एक साथ चार युवकों की मौत हुई हो। गमगीन माहौल में चारों युवकों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया है।
संस्कार में आसपास के गांवों से भी ग्रामीण गमजदा परिवारों को सांत्वना देने पहुंचे। वहीं, जिला परिषद के सदस्य नीलम के पति जगबीर खत्री ने बताया कि फाग पर दिनभर पूरे गांव में जश्न का माहौल रहा। ग्रामीणों ने भाईचारे के साथ एक-दूसरे को रंग लगाया। शाम को जैसे ही सड़क हादसे में चार युवकों की मौत की सूचना मिली तो खामोशी छा गई।
दवाइयों की दुकान पर काम करते थे मोहन
हादसे में जान गंवाने वालों में मोहन ही विवाहित थे। उनकी दो बेटियां व एक बेटा है। वह दवाइयों की दुकान पर काम करते थे। उनका छोटा भाई राजकुमार का भी निजी काम करते थे। उनकी शादी भी नहीं हुई थी। परिवार में पांच भाई थे। अब केवल राजकुमार व मोहन से बड़े भाई मुकेश ही बचे हैं।
सोनू व राजेश को मौत ने खींच लिया
ग्रामीणों ने बताया कि बाइक पर मोहन व राजकुमार जा रहे थे। गली में चचेरा भाई सोनू मिल गया। बोला-मैं भी साथ चलूंगा। आगे मोड़ पर पड़ोसी राजेश आ गया। वह भी बाइक पर बैठ गए। चारों रोहतक की तरफ चल पड़े। गांव से दो किलोमीटर आगे चुलियाणा मोड़ पर तेज स्पीड से आई अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। इसमें चारों युवकों की जान चली गई।
बाइक मिस्त्री थे सोनू
पांच भाइयों में सबसे छोटे भाई सोनू बाइक मिस्त्री थे जो अविवाहित थे। राजेश भी प्राइवेट काम धंधा करते थे। इसके अलावा परिवार में तीन भाई और हैं। इसमें नरेश, सतपाल व सुरेश हैं।
शाम चार बजे तक हो सका पोस्टमार्टम
पुलिस ने मृतक मोहन व राजकुमार के भाई मुकेश के बयान पर अज्ञात कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। ग्रामीण वीरवार दोपहर 12 बजे पीजीआई पहुंच गए थे। परिजनों के बयान दर्ज करने व दूसरे कागजात तैयार करने में समय लगा। शाम चार बजे तक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हो सकी। साढ़े पांच बजे अंतिम संस्कार किया जा सका।
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