मैक्रों ने G7 समिट के लिए PM मोदी को किया आमंत्रित, कहा- यह साझेदारी में तेजी लाने का वर्ष

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को 2026 में फ्रांस की अध्यक्षता वाले 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया और इसके पहले भारत और फ्रांस के बीच अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर समझौते के लिए अस्थायी बैठक का सुझाव दिया। पढ़ें रिपोर्ट-

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2026 में फ्रांस की अध्यक्षता में होने वाले 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया। एक प्रेस बयान में मैक्रों ने कहा कि जी7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत और फ्रांस के बीच अंतरराष्ट्रीय एजेंडा पर समझौता करने के लिए एक अस्थायी बैठक होनी चाहिए।

भारत अगले ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता करेगा और फ्रांस जी7 समूह की मेजबानी करेगा। इसे ध्यान में रखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के युवाओं के लिए नवाचार पर काम करने का अवसर बनाया जाना चाहिए।

मैक्रों ने कहा, यह 2026 हमारी साझेदारी में तेजी लाने और इस एजेंडे के कई हिस्सों को कार्रवाई में बदलने का वर्ष है। यह वही वर्ष है जिसमें प्रधानमंत्री आप ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता करेंगे और फ्रांस जी7 समूह की अध्यक्षता करेगा। इसी भावना में, मैंने प्रधानमंत्री मोदी को एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में एक विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इसी भावना में हम इस जी7 शिखर सम्मेलन से कुछ हफ्ते पहले अस्थायी बैठक के जरिये सहमति बनाने के इच्छुक हैं, ताकि हम अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर ठोस समझौते और प्रमुख असंतुलनों के समाधान पेश करने के प्रयास कर सकें।

इसी मकसद से हमने प्रधानमंत्री की ओर से आयोजित द्विपक्षीय सत्र के अंतर्गत नवाचार और युवाओं के लिए एक विशेष सत्र आयोजित करने का फैसला लिया है। इसमें शीर्ष विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के भारतीय युवाओं के साथ-साथ फ्रांस, यूरोप और जी7 देशों के युवा भी शामिल होंगे, ताकि हम नवाचार और हमारे सामने मौजूद समस्याओं के लिए निरंतर प्रयासरत रह सकें।

इसके अलावा, मैक्रों ने अनुसंधान, छात्र आदान-प्रदान और व्यापार के क्षेत्र में नई दिल्ली और पेरि से के बीच प्रभावी साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, यही वह बात है जो मैं प्रधानमंत्री मोदी के कथनों में जोड़ना चाहता था- विश्वास, महत्वाकांक्षा और हमारे संयुक्त प्रयासों को दोगुना करना। भारत और फ्रांस के बीच एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदारी रही है, जो दोनों देशों की जनता के हित में है और हाल के वर्षों में इसने कई अच्छे नतीजे दिए हैं। लेकिन हम इसे और अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, खासतौर से अनुसंधान, छात्रों के आदान-प्रदान और व्यापार के क्षेत्र में।

उन्होंने कहा, यह ऐसी साझेदारी भी है, जिसने सौर उर्जा, प्रमुख उर्जा संपर्क अवसंरचना या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दुनिया को ठोस समाधान प्रदान करके अत्यंत ठोस परिणाम हासिल किए हैं।

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