जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी में तोड़फोड़ में छात्र संघ के चारों पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष को निष्कासित करने का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। निष्कासन के खिलाफ बृहस्पतिवार को छात्र संघ ने विश्वविद्यालय में हड़ताल का ऐलान किया है। इसके तहत कक्षाओं का बहिष्कार और विरोध के लिए एसएल-एसआईएस परिसर में छात्र जुटेंगे। वहीं छात्र संघ के समर्थन में दूसरे छात्र संगठन भी आगे आ रहे हैं। छात्र संघ पदाधिकारियों के समर्थन में अब सांसद भी उतर आए हैं। इसे लेकर वे आज प्रेस वार्ता करने वाले हैं।
जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू ने कहा कि प्रशासन द्वारा पदाधिकारियों को निष्कासित करना यूनियन पर हमला है। हमारी प्रशासन से मांग है कि वह निष्कासन का आदेश वापस लें। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय में हड़ताल के जरिये विरोध दर्ज कराएंगे। अगर जरूरत पड़ी तो निष्कासन के खिलाफ कोर्ट भी जाएंगे। पदाधिकारियों को निष्कासित करना छात्र हितों पर हमला है। जिसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होगा। दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित करने और कैंपस परिसर से बाहर करने के आदेश के चलते अगले छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।
जब तक निष्कासन की अवधि पूरी होगी अगले छात्र संघ चुनाव की तारीख आ जाएगी। जेएनयू में छात्र संघ चुनाव बिना पदाधिकारियों के संभव नहीं है। इस निष्कासन के जरिये जेएनयू प्रशासन छात्रों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहा है। जिससे जेएनयू में छात्र संघ चुनाव न हो सकें। उन्होंने कहा कि जेएनयू छात्र संघ की मांग है कि सभी के निष्कासन के आदेश और जुर्माने तुरंत वापस हो, सीपीओ मैनुअल को वापस ले, यूजीसी के निर्देशों के अनुसार रोहित वेमुला एक्ट को लागू किया जाए।
पीएचडी जमा करने तक छात्रों को निकाला न जाएं। साथ ही जेएनयू कुलगुरु अपने पद से इस्तीफा दें। जब तक प्रशासन हमारी मांगों को नहीं मानेगा हमारी लड़ाई जारी रहेगी। पिछले वर्ष 21 नवंबर को सेंट्रल लाइब्रेरी में हुई तोड़फोड़ के विरोध में जेएनयू चीफ प्रॉक्टर ने छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष के.गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया है।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal