दिल्ली के नीलोठी गांव को आखिरकार हरियाली की सौगात मिली है। लंबे समय से प्रदूषण और औद्योगिक गतिविधियों के दबाव से जूझ रहे इस इलाके में अब 1000 नए पेड़ों ने जीवन की नई उम्मीद जगाई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह अहम कदम उठाया है।
खास बात ये है कि इन पेड़ों को लगाने के लिए इस्तेमाल की गई 8 लाख रुपये की राशि उन फैक्टरियों से वसूली गई, जिन्होंने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया था। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के अनुसार, यह राशि पत्थर तोड़ने वाली फैक्टरियों से वसूली गई है। ऐसे में अर्जुन, गूलर, कदंब और शीशम जैसे पेड़ न सिर्फ हवा को शुद्ध करेंगे, बल्कि आने वाले समय में नीलोठी गांव की पहचान को भी हरियाली से जोड़ेंगे।
एनजीटी कौ सौैंपी रिपोर्ट में बताया कि अदालत ने 23 नवंबर, 2023 को आदेश दिया था कि डीपीसीसी 8 लाख रुपये वन विभाग को दे, ताकि नीलोठी या आसपास के इलाकों में पेड़ लगाए जा सकें। 8 जनवरी, 2025 को एनजीटी ने फिर याद दिलाया और 6 महीने में रिपोर्ट मांगी। डीपीसीसी ने 30 दिसंबर 2024 को चेक देकर राशि ट्रांसफर की। ऐसे में वन विभाग ने इस पैसे का इस्तेमाल करने के लिए पहले जमीन ढूंढी।
फिर 27 जनवरी, 2025 को पश्चिम जिले के जिलाधिकारी को पत्र लिखा कि नीलोठी में पेड़ लगाने के लिए जमीन बताएं। इसी कड़ी में 13 फरवरी, 2025 को फिर याद दिलाया। वहीं, 19 फरवरी 2025 को एसडीएम पंजाबी बाग, एमसीडी, आईएंडएफसीडी, पीडब्ल्यूडी, डीजेबी और डीडीए के साथ जॉइंट सर्वे का नोटिस जारी किया। 27 फरवरी 2025 को सर्वे हुआ और 20 एमजीडी एसटीपी नीलोठी फेज-2 की जमीन चुनी गई।
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