आज है फाल्गुन की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, बन रहे ये शुभ-अशुभ योग

पंचांग के अनुसार, आज यानी 5 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और सभी कामों में सफलता मिलती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।

तिथि: कृष्ण चतुर्थी
मास: फाल्गुन
दिन: गुरुवार
संवत्: 2082

तिथि: कृष् चतुर्थी – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 22 मिनट तक
योग: सुकर्मा – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 04 मिनट तक
करण: बव – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट मिनट तक
करण: बालव – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 22 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 07 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 03 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: रात 09 बजकर 35 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: प्रातः 09 बजकर 05 मिनट पर

सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: मकर
चन्द्र देव: कन्या

आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 03 बजकर 32 मिनट से सायं 05 बजकर 11 मिनट तक

आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से दोपहर 03 बजकर 19 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 51 मिनट से प्रातः 11 बजकर 13 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 07 मिनट से प्रातः 08 बजकर 29 मिनट तक

आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र: रात्रि 10 बजकर 57 मिनट तक।
सामान्य विशेषताएं: विनम्रता, मेहनती स्वभाव, बुद्धिमत्ता, मददगार, उदार, ईमानदारी, बुद्धिमान, अध्ययनशील और परिश्रमी
नक्षत्र स्वामी: सूर्य देव
राशि स्वामी: सूर्य देव, बुध देव
देवता: आर्यमन (मित्रता के देवता)
गुण: राजस
प्रतीक: बिस्तर

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक पावन व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन गणपति की श्रद्धापूर्वक उपासना करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। व्रत में दिनभर उपवास रखकर संध्या के समय चंद्र दर्शन के बाद पारण किया जाता है। दूर्वा और मोदक अर्पण से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य की वृद्धि मानी जाती है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान गणेश का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
दिनभर उपवास रखें या फलाहार करें।गणपति को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें।
संध्या समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दें।
गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ करें।
चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।

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