गयाजी रेलवे स्टेशन पर ऑपरेशन ‘विलेप’ के तहत आरपीएफ और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दुर्लभ रेड सैंड बोआ सांप के साथ दो तस्कर गिरफ्तार किए गए। आरोपियों पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पूर्व मध्य रेल के डीडीयू मंडल अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल पोस्ट गया द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘विलेप’ के तहत वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हाथ लगी है। 03 फरवरी को गयाजी रेलवे स्टेशन पर गश्त के दौरान दुर्लभ प्रजाति के रेड सैंड बोआ सांप की बरामदगी के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में आरपीएफ, सीआईबी, सीपीडीएस टीम और वन विभाग गया की संयुक्त भूमिका रही।
प्लेटफार्म पर संदिग्ध गतिविधि से खुला मामला
आरपीएफ पोस्ट गया से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को प्लेटफार्म संख्या-01 बी पर नियमित गश्त के दौरान दो व्यक्ति आसमानी रंग के एक बैग के साथ संदिग्ध अवस्था में पाए गए। आरपीएफ टीम को देखते ही दोनों व्यक्ति भागने लगे, लेकिन तत्परता दिखाते हुए टीम ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पकड़े गए व्यक्तियों ने पूछताछ में अपना नाम उपेन्द्र कुमार (28), निवासी सिरीपुर, थाना मकदुमपुर, जिला जहानाबाद और मोहम्मद सादुल्ला (46), निवासी अमराहा, थाना चाकन्द, जिला गया बताया। दोनों से जब उनके बैग के संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि उसमें दुर्लभ प्रजाति का मृत रेड सैंड बोआ सांप रखा हुआ है।
वन विभाग की टीम मौके पर बुलाई गई
इस कबूलनामे के बाद तत्काल वन विभाग गया को सूचना दी गई। सूचना के अनुपालन में वनरक्षी वशिष्ट कुमार, स्नेक कैचर रंजीत कुमार और क्यूआरटी गया की टीम आरपीएफ पोस्ट गया पहुंची। संयुक्त कार्रवाई के दौरान बैग से लगभग चार फीट लंबा मृत रेड सैंड बोआ सांप बरामद किया गया।
कानूनी कार्रवाई और केस दर्ज
बरामद सांप को विधिवत जप्त कर दोनों आरोपियों को मय सामान वन विभाग गया के सुपुर्द कर दिया गया। इस संबंध में आरपीएफ पोस्ट गया के स0उ0नि0 मृत्युंजय कुमार अकेला द्वारा दिए गए शिकायत पत्र के आधार पर वन विभाग गया में कांड संख्या 09/26 दर्ज की गई है। आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2, 9, 39, 40(2), 48, 50, 51, 58A एवं 59 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रेड सैंड बोआ की तस्करी गंभीर अपराध
उल्लेखनीय है कि रेड सैंड बोआ सांप वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध एक अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य प्रजाति है। इसकी तस्करी को गंभीर अपराध माना जाता है। आरपीएफ और वन विभाग की इस संयुक्त कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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