एक फरवरी रविवार को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर हरियाणा की नजरें टिकी हुई है। इस बार के बजट से हरियाणा को काफी बड़ी आस है। हरियाणा अपनी मांगें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंप चुका है। हरियाणा ने केंद्र से स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योगों में अधिक बजट आवंटन की मांग रखी है। पिदले दिनों मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी मजबूती से अपनी बात रखते हुए कहा था कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में हरियाणा अपना पूरा योगदान देगा।
हरियाणा में टीबी के बढ़ते मरीज को देखते हुए राज्य सरकार ने टीबी अस्पताल की मांग रखी हुई है। इसाके साथ ही जिला स्तर पर मेमोग्राफी व फाइब्रोस्कैन सुविधाओं की मांग रखी हुई। वहीं, चिकित्सा शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए हरियाणा हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना बना रहा है। इसके लिए भी केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत मदद की बड़ी जरूरत है। वहीं, राज्य सरकार ने एनसीआर क्षेत्र के लिए भी विशेष पैकेज मांगा हुआ है।
एनसीआर क्षेत्र लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे देश के सभी प्रमुख बाजारों से कनेक्टिविटी और माल की सप्लाई आसान व समयबद्ध हो जाएगी। ऐसे में इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक केंद्रीय पूंजी निवेश की जरूरत है। हरियाणा सरकार राज्य में दस आईएमटी बनाने जा रही है। राज्य सरकार ने केंद्र से आईएमटी को विकसित करने के लिए भी केंद्र से सहयोग मांगा है। राज्य सरकार का मानना है कि इन आईएमटी में भारी पूंजी निवेश भी होगा।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में आर्थिक सहायता बढ़ाने की मांग
हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत 3200 रुपये प्रति माह देता है। हरियाणा पूरे प्रदेश में 44 लाख से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन देता है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे हरियाणा की जनता सशक्त बन रही है और विकास में योगदान बढ़ा है। ऐसे में इस मद में भी आर्थिक राज्य की आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए। राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास के कोष को बढ़ाने की डिमांड रखी। बढ़ती बुनियादी ढांचे की जरूरतों और ग्रामीण विकास की गति को बनाए रखने के लिए आरआईडीएफ के तहत सामान्य आवंटन को अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,000 करोड़ रुपये करने मांग की गई है। इसके अलावा सेम से प्रभावित 6 लाख एकड़ जमीन के लिए दी वित्तीय सहायता की मांग की गई है।
जीडीपी में हरियाणा का 3.7 योगदान
हरियाणा भौगोलिक रूप से एक छोटा राज्य होने के बावजूद देश की जीडीपी में 3.7 प्रतिशत योगदान कर रहा है। कर संग्रह के मामले में भी प्रदेश अग्रणी है। वहीं प्रति व्यक्ति जीएसटी संग्रहण में देश में प्रथम स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर कुल जीएसटी संग्रह में हमारा योगदान 7.32 प्रतिशत है। दिसंबर, 2025 तक देश में 5वें स्थान पर रहे हैं। हरियाणा ने इस वित्त वर्ष में शुद्ध एसजीएसटी संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो 6 प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है।
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