विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अरब लीग के कई देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने और मध्य पूर्व की हाल की घटनाओं का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद आज शनिवार को द्वितीय भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक आयोजित होगी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कई अरब लीग सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में भारत-अरब देशों के रिश्तों को मजबूत करने, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और मध्य पूर्व में हाल की घटनाओं का व्यापक मूल्यांकन करने पर चर्चा हुई। यह बैठक भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता में सक्रिय भूमिका को दर्शाती है।
जयशंकर ने कोमोरोस, लीबिया, सोमालिया और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल घीत से भी भेंट की। बता दें कि नई दिल्ली में आज यानी शनिवार को भारत-अरब लीग द्वितीय विदेश मंत्री बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इन मुलाकातों पर क्या बोले जयशंकर
जयशंकर ने घीत से मिलने के बाद कहा कि हमने सहयोग बढ़ाने और इसे विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने पर लंबी चर्चा की। साथ ही क्षेत्र में हाल की घटनाओं पर विचार साझा किए। इसके बाद सोमालिया के विदेश मंत्री अब्दिसलाम अली से बैठक को जयशंकर ने उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि हमने व्यापार, क्षमता निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, वीजा और बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।
लीबिया से व्यापार और ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा
लीबिया के विदेश मंत्री एल्ताहेर एस. एम. एल्बौर से उन्होंने व्यापार और ऊर्जा क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि हमने व्यापार, व्यवसाय, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर उत्पादक चर्चा की। साथ ही लीबिया में स्थिति की जानकारी सराहनीय थी। भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति चाहता है।
सूडान में हिंसा समाप्त कर संवाद की आवश्यकता
सूडान के विदेश मंत्री मोहियेल्डिन सलीम अहमद इब्राहिम से मुलाकात में जयशंकर ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण सूडान में हिंसा बंद करने और संवाद शुरू करने का है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग जारी रहेगा और इसे और बढ़ाया जाएगा।
फलस्तीन के साथ विकास सहयोग पर चर्चा
इसके साथ ही फलस्तीन के विदेश मंत्री वरें अघाबेकियन शाहिन से चर्चा में जयशंकर ने गाजा शांति योजना और क्षेत्रीय घटनाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि हमने विकास सहयोग की समीक्षा की और इसे आगे बढ़ाने के लिए नई पहल करने पर सहमति बनाई।
गाजा में शांति के लिए अमेरिका-नेतृत्व वाले बोर्ड का समर्थन जरूरी- अबूल घीत
अरब लीग के महासचिव अहमद अबूल घीत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा कि गाजा में शांति स्थापित करने के लिए अरब देशों का अमेरिका-नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का समर्थन सही कदम है। उन्होंने कहा कि यह बोर्ड एक अद्वितीय अवसर प्रदान करता है क्योंकि पहले कई कूटनीतिक प्रयास असफल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खाड़ी के देश हमेशा सैन्य संघर्ष का विरोध करते रहे हैं और कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। उन्होंने अमेरिका की पूर्व प्रशासनिक नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्राइल का सीधे समर्थन किया, जिससे कई सुरक्षा परिषद प्रस्ताव अस्वीकार हो गए। ऐसे में अरब देशों ने बोर्ड में शामिल होकर शांति स्थापित करने की दिशा में कदम उठाया।
बोर्ड में फंडिंग निगरानी को लेकर सवाल- घीत
अहमद अबूल घीत ने यह भी कहा कि बोर्ड के कार्यान्वयन में अभी फंडिंग, निगरानी और संयुक्त राष्ट्र के साथ समन्वय जैसे कई सवाल बने हुए हैं। साथ ही उन्होंने गाजा के मुद्दे के अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान पर कोई सैन्य हमला पूरे क्षेत्र और विश्व के लिए नकारात्मक परिणाम देगा।
उन्होंने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर भी टिप्पणी की और कहा कि खाड़ी और लाल सागर में अमेरिकी फौज की उपस्थिति नई नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन की नीतियों में बदलाव देखा जा रहा है। इसके साथ ही फलस्तीन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आक्रमणकारी शक्तियां राजनीतिक मांगों को स्वेच्छा से नहीं मानतीं। उन्होंने वैश्विक अस्थिरता और शीत युद्ध जैसी परिस्थितियों पर भी चिंता जताई और कहा कि नया अंतरराष्ट्रीय क्रम बिना संघर्ष के नहीं बन सकता।
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