महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से पहले लाड़की बहिन योजना को लेकर बहाल हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि महिलाओं को चुनावों से कुछ दिन पहले पैसे दिए जा रहे हैं जो अचार संहिता का उल्लंघन है।
महाराष्ट्र में राज्य चुनाव आयोग ने लाड़की बहिन योजना दिए जा रहे पैसों से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। दरअसल विपक्ष का दावा है कि योजना के तहत लाभार्थियों को पैसे मकर संक्रांति से पहले दिए जाएंगे। इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जा रहा है। आरोप है कि 15 जनवरी को होने वाले नगर निगमों के चुनावों से पहले महिलाओं को पैसे देना मतदाताओं को लुभाने जैसा है। लाड़की बहिन योजना राज्य सरकार की एक प्रमुख योजना है जिसके तहत योग्य महिला लाभार्थियों को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता मिलती है। इस योजना को 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति को जीत दिलाने में काफी मददगार माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य चुनाव आयोगने मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल से सोमवार को रिपोर्ट जमा करने को कहा है। पिछले हफ्ते एक सोशल मीडिया पोस्ट में, भाजपा नेता और राज्य मंत्री गिरीश महाजन ने कहा था कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की किस्तों को मिलाकर 3,000 रुपये की सहायता राशि योग्य लाभार्थियों के बैंक खातों में मकर संक्रांति से पहले जमा कर दी जाएगी।
कांग्रेस नेता संदेश कोंडविलकर ने की शिकायत
राज्य कांग्रेस नेता और वकील संदेश कोंडविलकर ने शनिवार को SEC में शिकायत दर्ज कराई। दावा किया गया कि पैसों का भुगतान 14 जनवरी यानी चुनाव से एक दिन पहले प्रस्तावित था, जिसे तुरंग रोकने की मांग की।
सूत्रों के अनुसार SEC ने रविवार को राज्य के मुख्य सचिव को एक पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा और पूछा कि क्या सरकार चुनावों से ठीक पहले दो महीने की किस्तें एक साथ जारी करना चाहती है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिया जवाब
दावों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी बयान सामने आया। उन्होंने कहा लाड़की बहिन योजना राज्य सरकार की एक सतत योजना है और यह चुनाव आचार संहिता के प्रतिबंधों के तहत नहीं आती है।
हालांकि, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि पार्टी इस योजना के खिलाफ नहीं है, लेकिन मतदान से ठीक पहेल की शाम को दो महीने के पैसे देने पर आपत्ति जताई, इसे आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन बताया।
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