भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में हालिया तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित भारी 500% टैरिफ (Donald Trump tariff) को लेकर काफी चर्चा है। ऐसे में हम आपको भारत असल में अमेरिका से किन प्रमुख चीजों का आयात (What India Imports from USA) करता है। इसके बारे में बता रहे हैं। वहीं 50 फीसदी टैरिफ के बाद 500 फीसदी टैरिफ के इस नए घटनाक्रम के क्या मायने हैं बता रहे हैं।
अमेरिका से भारत आने वाली प्रमुख वस्तुएं
ट्रेड इकोनॉमिक्स आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत ने अमेरिका से लगभग 39 अरब डॉलर का सामान मंगवाया। जिनमें से रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजों की जानकारी हम नीचे दे रहे हैं।
मेवे और फल
भारत कैलिफोर्निया के बादाम का बहुत बड़ा बाजार है। इसके अलावा अखरोट, पिस्ता और अमेरिकी सेब भी बड़ी मात्रा में भारत आते हैं। इस सेक्टर का आयात करीब 9,700 करोड़ रुपये का है।
शराब और पेय पदार्थ
भारतीय महानगरों में प्रीमियम अमेरिकी व्हिस्की (जैसे Jim Beam) और वाइन की मांग काफी है। लगभग 3,920 करोड़ रुपये की शराब अमेरिका से आयात की जाती है।
प्रोसेस्ड आलू, विदेशी सब्जियां
प्रोसेस्ड आलू, विदेशी सब्जियां, चॉकलेट, कैंडी और नाश्ते के लिए अनाज (सीरियल्स और ओट्स) भी अमेरिकी ब्रांड्स के माध्यम से भारतीय रसोई तक पहुंच रहे हैं।
पैकेज्ड फूड
रेडी-टू-ईट खाना सॉस और डिब्बाबंद फल ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजारों में तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं।
इस US-India व्यापारिक तनाव पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 500% टैरिफ लगाने की धमकी ने व्यापार जगत में चिंता पैदा कर दी है। इस पर विशेषज्ञों का क्या कहना है, समझते हैं।
निर्यात पर संकट
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अजय श्रीवास्तव के अनुसार, यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को होने वाला भारत का 87.4 अरब डॉलर का निर्यात लगभग ठप हो सकता है। 500% ड्यूटी का मतलब है कि भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में इतने महंगे हो जाएंगे कि उन्हें कोई नहीं खरीदेगा।
रणनीतिक स्पष्टता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी विदेश और व्यापार नीति पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए। रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों पर भारत को अपनी संप्रभुता स्पष्ट करनी होगी ताकि वह अमेरिका के दबाव और टैरिफ के दोहरे नुकसान से बच सके।
बिल की राह आसान नहीं
हालांकि ट्रंप ने कड़े टैरिफ की बात कही है, लेकिन इसे अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट से पास कराना होगा, जो इतना आसान नहीं है। जानकारों का कहना है कि यह कदम सिर्फ भारत को निशाना बनाने जैसा लग रहा है, जबकि चीन इससे अप्रभावित रह सकता है।
वैकल्पिक बाजारों की तलाश
पूर्व वाणिज्य सचिव अजय दुआ जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जल्द से जल्द अमेरिका के अलावा अन्य देशों में अपने सामान के लिए नए बाजार तलाशे।
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