हिसार दौरे पर CJI का दूसरा दिन: बरवाला में SDJM कोर्ट का किया उद्घाटन

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि अपराध के बदलते तरीकों और वैश्विक स्तर पर उभरती नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिवक्ताओं को खुद को ग्लोबल लीडर के रूप में तैयार करना होगा।

सीजेआई सूर्यकांत शनिवार को हिसार-हांसी जिले के चार कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। सबसे पहले बरवाला में एसडीजेम कोर्ट का उद्घाटन किया। सीजेआई ने करीब 11.15 बजे बरवाला एसडीजेएम कोर्ट का उद्घाटन किया। कुछ देर बाद नारनौंद में एसडीजेएम कोर्ट का उद्घाटन करेंगे। दोपहर करीब एक बजे सीजेआई अपने पैतृक गांव पेटवाड़ में आयोजित होने वाले अभिनंदन समारोह में पहुंचेंगे।दाेपहर बाद करीब 2.30 से 3 बजे के बीच सीजेआई हिसार में राजकीय पीजी कॉलेज में पूर्व छात्र मिलन समारोह कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

अधिवक्ता खुद को ग्लोबल लीडर के तौर पर तैयार करें: सीजेआई सूर्यकांत
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि अपराध के बदलते तरीकों और वैश्विक स्तर पर उभरती नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिवक्ताओं को खुद को ग्लोबल लीडर के रूप में तैयार करना होगा। अधिवक्ता ई-लाइब्रेरी, डिजिटल संसाधनों और आधुनिक तकनीक से लैस होंगे तो न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि न्याय देने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।

शुक्रवार को हिसार और हांसी बार एसोसिएशन की ओर से अपने सम्मान में आयोजित समारोह में संबोधित कर रहे थे। नारनौंद क्षेत्र के गांव पेटवाड़ के रहने वाले जस्टिस सूर्यकांत सीजेआई बनने के बाद दो दिवसीय दौरे पर पहली बार हिसार आए हैं। देर शाम मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी हिसार पहुंच गए। वे शनिवार को सीजेआई के पैतृक गांव में होने वाले सम्मान समारोह में शामिल होंगे।

हिसार न्यायिक परिसर में शाम करीब 6 बजे आयोजित समारोह में सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और तकनीक आधारित अपराधों के मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए वकीलों को डिजिटल साक्ष्यों की विश्लेषण क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने आधुनिक तकनीक का विश्व में सबसे अधिक उपयोग किया है।

यहां केस फाइल होने से लेकर फैसला आने तक सभी अपडेट ऑनलाइन होते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान वर्चुअल कोर्ट एवं डिजिटल माध्यमों से न्याय प्रक्रिया को निर्बाध जारी रखकर वैश्विक मिसाल पेश की। दुनिया के कई देश इस सिस्टम के लिए हमारे साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को 16 भाषाओं में अनुवाद किया जाता है। ताकि अधिवक्ता इनका अध्ययन कर खुद को अपडेट रख सकें।

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