इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एक बार फिर कहा कि चाइनीज मांझा के निर्माण, उपयोग और बिक्री पर राज्य सरकार प्रतिबंध लगाए। चाइनीज मांझा मानव के साथ ही पक्षियों के लिए भी घातक है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने दिया है। जौनपुर निवासी हिमांशु श्रीवास्तव व दो अन्य ने जनहित याचिका दायर कर चाइनीज मांझा की बिक्री, निर्माण व उपयोग पर रोक लगाने की मांग की थी।
याचीगण के अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने दलील दी कि चाइनीज मांझा बनाने के लिए जिस सामग्री का प्रयोग किया जाता है वह इसे ब्लेड की तरह तेज धार वाला बना देते हैं। इससे कपड़ा पहने होने के बाद भी शरीर को काट देता है। यह मानव, जानवर, पक्षियों के जीवन के लिए खतरा है। दलील दी कि 11 दिसंबर 2025 को अध्यापक संदीप तिवारी अपनी बच्ची को स्कूल छोड़कर आ रहे थे। शास्त्री ब्रिज पर पहुंचते ही चाइनीज मांझा से गला कटने से उनकी मृत्यु हो गई। हाईकोर्ट ने पूर्व की याचिकाओं पर प्रदेश के सभी जिले के कलेक्टर को चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद इसकी बिक्री जारी है।
कोर्ट ने दलीलों को सुनने के बाद कहा कि 19 नवंबर 2015 को एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को कानून के अनुसार चाइनीज मांझा की बिक्री, उपयोग व निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। राज्य सरकार इस न्यायालय की ओर से जारी निर्देशों को पालन करने के लिए बाध्य है। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जब पतंगबाजी चरम पर हो तो चीनी मांझा के निर्माण, उपयोग और बिक्री न हो जिससे पंक्षियों और मनुष्यों का जीवन खतरे में पड़े। इसी के साथ याचिका निस्तारित कर दी।
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