हिंदू धर्म में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। इसमें पूजा-पाठ से जुड़े नियमों के बारे में बताया गया है। हवन को विधिपूर्वक करने से भक्त को शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं और घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है, लेकिन इसका शुभ फल तभी प्राप्त होगा जब हवन के दौरान नियमों का ध्यान रखा जाएगा।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही दिशा में अनुष्ठान करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में आइए आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताते हैं कि हवन के दौरान मुख किस दिशा में होना चाहिए और इस अनुष्ठान से जुड़े नियम क्या हैं।
हवन के दौरान किस दिशा में हो मुख?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, हवन के दौरान यजमान का मुख पूर्व या फिर उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। इन दोनों दिशाओं को पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। इस दिशा में मुख करके अनुष्ठान करने से सफलता प्राप्त होती है।
पूर्व दिशा में मुख करके पूजा करने से आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान, ऐश्वर्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। वहीं, उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा की तरफ मुख करके हवन में आहुति देने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि में अपार वृद्धि होती है। साथ ही आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है।
कौन-सी दिशा है अशुभ?
वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि हवन के दौरान मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन दिशाओं में मुख करके पूजा करने से साधना या पूजा का सकारात्मक फल नहीं मिलता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि हवन करने से पहले इससे जुड़े नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।
हवन कुंड का स्थान
हवन के दौरान मुख की दिशा के अलावा कुंड के स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। हवन कुंड को दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह अग्नि देव की दिशा है।
इन बातों का रखें ध्यान
हवन में आहुति देते समय स्वाहा मंत्र का जप करना चाहिए।
इस दौरान किसी के बारे में गलत विचार मन में न लाएं।
काले रंग के कपड़े भूलकर भी धारण न करें।
हवन हमेशा सूर्यास्त से पहले करना शुभ माना जाता है।
हवन की जगह पर साफ-सफाई होनी चाहिए और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध कर लेना चाहिए।
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