दिल बेचारा रिव्यू 

फ़िल्म : दिल बेचारा

निर्देशक : मुकेश छाबड़ा

कलाकार : सुशांत सिंह राजपूत, संजना सांघी, स्वास्तिका मुखर्जी, शाश्वत और अन्य

रेटिंग : तीन

मुंबई एक एक्टर अपनी एक्टिंग से पहचाना जाता है। अपने जाने के बाद भी वह लोगों के दिलों में ज़िंदा रहता है और ये बात सुशांत सिंह राजपूत की लास्ट  फिल्म दिल बेचारासे साबित होती है। सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फ़िल्म दिल बेचारा 24 जुलाई को डिज्‍नी प्‍लस हॉटस्‍टार पर रिलीज हो चुकी है।

फिल्म में मुख्य रोल में नज़र आनेवाले सुशांत जमशेदपुर का एक लड़का  हैं जो एक खुशमिजाज और अपनी दुनिया में जीने वाला लड़का दिखाया गया है। इस लड़के का नाम ‘मैनी’ है जो मज़ाक करते हुए हर परेशानी को आसान कर देने वाला दिखाया गया है। मैनी जो खुद एक कैंसर ऑस्ट्रियोसर्कोमा से जूझ रहा है और इसके कारण उसकी एक टांग भी चली गई है उसकी मुलाकात लीड ऐक्ट्रेस संजना सांघी जिन्हे इस फिल्म में ‘किजी’ नाम दिया गया है और दिखाया गया है कि उन्हें थायरॉयड कैंसर है। वह हर समय अपने ऑक्सीजन सिलेंडर एक बैग में लेकर साथ चलती हैं। किजी जमशेदपुर में अपने माँ बाबा के साथ रहती है. उसे अपनी ज़िन्दगी से शिकायत है कि यह सब उसके साथ ही क्यों हुआ।  एक दिन उसकी जिंदगी मैनी (सुशांत सिंह राजपूत) की एंट्री होती है और उसकी जिंदगी बदल जाती है।

मैनी, किजी को ज़िन्दगी जीनेका एक नया फलसफा दे जाते हैं। फिल्म की पांच लाइन है, ‘जन्म कब होगा और मृत्यु कब आएगी ये तो हम में से कोई भी तय नहीं कर सकता लेकिन ज़िन्दगी कैसे जीना है, यह हम ज़रूर तय कर सकते है’ । लेकिन फ़िल्म की कहानी में ट्विस्ट तब आ जाता है जब मैनी को पता चलता है कि किजी का एक फेवरिट सिंगर है जिसका नाम अभिमन्यु वीर सिंह है लेकिन उसका आखिरी गाना अधूरा है। किजी अपनी जिंदगी में अभिमन्यु से मिलना चाहती है और उसकी यह इच्छा खुद कैंसर से जूझता मैनी पूरी करना चाहता है लेकिन इससे पहले किजी की तबीयत बिगड़ जाती है। अब किजी को मरने से डर लगने लगाता है क्योंकि उसे मैनी से प्यार हो गया है। किजी को लगता है कि वह मैनी पर बोझ बन रही है लेकिन मैनी किजी को अकेला नहीं छोड़ना चाहता। फिल्म के अंत में क्या होता है, इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

इस फिल्म में दोनों ही लिड एक्टर्स ने बखूबी एक्टिंग की है। फिल्म में काफी इमोशंस दिखाई देते हैं। सुशांत अपनी डायलॉग डिलीवरी,  बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन से किधार में जान डाल देते हैं।  संजना सांघी भी बतौर लीड ऐक्ट्रेस पूरे आत्मविश्वास से अपने चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाया है। फिल्म में गानों और बैग्राउंड म्युज़िक का बेहतरीन इस्तेमाल किया गया है और जमशेदपुर के खूबसूरत लोकेशन्स फ़िल्म में एक अलग ही रंग भरते हैं।

कुलमिलाकर सुशांत के टैलेंट का ये फ़िल्म प्रदर्शन करती है। वह अपनी दमदार एक्टिंग से एक और उम्दा किरदार और कहानी पर्दे पर जीवंत कर गए हैं।