विमानन उत्सर्जन से पर्यावरण को खतरा

वैश्विक विमानन उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन पर काफी प्रभाव पड़ता है। कार्बन उत्सर्जन में विमानन की हिस्सेदारी लगभग चार फीसदी की है। हालांकि विशेषज्ञों का यह मानना है कि अगर उड़ानों की संख्या कुछ कम हो, तब उत्सर्जन करीब 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरमेंट नाम की एक पत्रिका में शोधकर्ताओं ने साल 2023 में 2.7 करोड़ से अधिक की वाणिज्यिक उड़ानों का विश्लेषण किया।

विमानन उत्सर्जन से कम होगा कार्बन उत्सर्जन

शोधकर्ताओं ने इस विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकाला कि दुनियाभर में उड़ानों की संख्या को कम करके विमानन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। विमानन उत्सर्जन के कम होने से कार्बन उत्सर्जन काफी हद तक कम हो जाएगा।

उड़ानों के लिए ऐसे विमानों का इस्तेमाल किया जाए, जिनमें ऊर्जा की खपत कम हो और ऐसे ही विमानों में अधिकतम यात्री सफर करें, तब उत्सर्जन को 22 से 57 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
सबसे कुशल विमानों, जिनमें इकोनमी क्लास भी हो, अगर इन्हें 95 फीसदी लोड फैक्टर के साथ उड़ाया जाए, तब भी कार्बन उत्सर्जन में 50 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है।

50 फीसदी तक कार्बन उत्सर्जन होगा कम

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता और भौतिकी विभाग के सह-लेखक मिलान क्लोवर का कहना है कि कुछ ऐसे उपाय हैं, जिन्हें हम अभी से उपयोग में ला सकते हैं।

मिलान क्लोवर का मानना है कि सबसे कम ऊर्जा की खपत करने वाले विमानों को उन्हीं मार्ग पर चलाया जाए, जिन पर एयरलाइंस पहले से ही उड़ान भर रही हैं। इन्हीं मार्गों पर उड़ानों के आगे बढ़ने से तुरंत ही 11 फीसदी की कमी हो सकती है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com