रूस से तेल खरीदने पर भारत-चीन पर 100% टैक्स लगाने की तैयारी में ट्रंप सरकार

US सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल को पारित कर दिया है, जिससे भारत और चार अन्य देशों पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा पैदा हो गया है।

अमेरिकी सीनेट में पारित हुए इस बिल का मकसद यूक्रेन पर हमले को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इस बिल के समर्थन में वोटिंग के दौरान 86 वोट पक्ष में और 12 वोट विपक्ष में पड़े।

रूस से तेल खरीदने पर लगेगा 100% टैरिफ

रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े इस बिल को दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था। US सीनेट में यह बिल मंगलवार को तब पेश किया गया, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की US संसद भवन के दौरे पर थे।

इस बिल का मकसद रूसी तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगाना है। इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं, उन पर भारी टैक्स लगाने की मंजूरी देना है।

अमेरिका इस टैरिफ के जरिए तमाम देशों को बताना चाहता है कि रूस से ऊर्जा व्यापार पर रोक लगाई जाए। अप्रैल 2025 में पेश किए गए इस बिल के बारे में ग्राहम ने इस साल की शुरुआत में बताया था कि US और भारत के बीच व्यापारिक तनाव के बावजूद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे मंजूरी दे दी थी।

पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते रूसी ऊर्जा पर भारत की निर्भरता बढ़ गई है। वहीं यह  बिल ऐसे समय में आया है, जब युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग को बाधित है।

भारत इस जलमार्ग से पहले कुल तेल आयात का लगभग 40% हिस्सा लेता था, लेकिन युद्ध की वजह से रिफाइनरियों को मुख्य विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल का रुख करना पड़ा।

भारत पर रूस सैंक्शन बिल का क्या होगा असर?

US ने सबसे पहले अगस्त 2025 में रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। वहीं भारत की रूस से दोस्ती जारी रहने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस टैरिफ को 50 प्रतिशत कर दिया।

ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी ने दोनों सहयोगी देशों के बीच तनाव भी पैदा कर दिया, जिससे व्यापार वार्ता रुक गई। लेकिन जब 28 फरवरी में US-ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ, तब होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो गया।

होर्मुज बंद होने की वजह से US ने रूसी तेल पर से प्रतिबंध कुछ समय के लिए हटा दिए। अमेरिका का मानना था कि इन खरीदारियों से रूस को कोई फायदा नहीं होगा।

मिडिल ईस्ट युद्ध के दौरान भारत ने रूस से तेल की रिकॉर्ड खरीदारी की। जून 2026 में रूस से भारत का कच्चा तेल आयात 34% बढ़ गया।

‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ के अनुसार, इस आयात की कीमत €4.5 बिलियन थी, जो रूस के कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कुल कमाई का लगभग 36% हिस्सा था। लेकिन अब अमेरिका रूसी तेल की खरीद पर पूरी तरह रोक लगाने जा रहा है।

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com