मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। इस पर गृह विभाग तैयारी कर रहा है। इसके लिए एक स्टेट लेवल कमेटी बनाई जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। मध्यप्रदेश सरकार ने इस विषय पर अन्य राज्यों के मॉडल का भी अध्ययन करेंगी। इसमें गोवा सिविल कोड का अधिकारी अध्ययन करेंगी। विशेष रूप से उन राज्यों के अनुभवों को देखा जा रहा है, जहां इस तरह के कानून पर काम हो चुका है या प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इसके आधार पर प्रदेश के लिए उपयुक्त प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।
व्यावहारिक मॉडल होगा लागू
सरकार यूसीसी लागू करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों से भी चर्चा की जाएगी, ताकि किसी वर्ग की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और कानून व्यावहारिक कानून लागू किया जा सके। बता दें इससे पहले मुख्यमंत्री कई मौकों पर संकेत दे चुके है कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल हैं। राज्य सरकार का मानना है कि यूसीसी लागू होने से विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। इससे अलग-अलग धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान व्यवस्था बनेगी।
क्या होंगे बदलाव
यदि यूसीसी लागू होता है, तो सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक के नियम एक समान होंगे। बेटा-बेटी को संपत्ति में अधिकारों को लेकर समानता आएगी। लिव इन रिलेशनशिप में रहने पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। यदि सबकुछ तय समय के अनुसार होता है तो संभावना है कि मानसून सत्र में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
आदिवासी समुदाय के परंपरागत नियम
मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहता है। उनकी अलग परंपराए हैं। प्रदेश सरकार हर वर्ग की संवेदनशीलताओं को लेकर कानून बनाने पर विचार कर रही है। यह सरकार के लिए किसी चुनौती से भी कम नहीं है। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग की 47 सीटें आरक्षित हैं।
इन राज्यों में लागू है यूसीसी
गोवा में देश का सबसे पुराना यूसीसी कानून लागू हैं। यहां पर पुर्तगाली सिविल कोड (1867) लागू है। यह स्वतंत्र भारत में यूसीसी का सबसे पुराना उदाहरण है और सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है। वहीं, उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य है। यहां पर फरवरी 2024 में बिल पास हुआ और 27 जनवरी 2025 से औपचारिक रूप से लागू किया गया। 2026 में इसमें संशोधन कर अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है।
वहीं, गुजरात में मार्च 2026 में गुजरात विधानसभा ने यूनिफार्म सिविल कोड बिल 2026 पास किया। उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य जहां यूसीसी कानून पारित हो चुका है। यहां पर भी बहुविवाह पर रोक, विवाह/तलाक/संपत्ति/लिव-इन पर समान नियम है। इस कानून में भी अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई। गुजरात में अभी पूर्ण रूप से यूसीसी लागू होने की प्रक्रिया चल रही है।
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