भारतीय सनातन परंपरा और पुराणों में प्रकृति को साक्षात् ईश्वर के समान पूजा जाता है। वृक्षों को सिर्फ वनस्पति नहीं, बल्कि देवी-देवताओं का निवास स्थान भी माना जाता है। पद्म पुराण, मत्स्य पुराण और वाराह पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में प्रकृति के संरक्षण को धर्म का कार्य बताया गया है।
इन ग्रंथों में कुछ खास वृक्षों के महत्व पर जोर देते हुए पेड़ों को काटना महापाप बताया गया है और ऐसा करने वाले मनुष्य पर गंभीर अपराध लगता है।
मत्स्य पुराण के एक श्लोक में बताया गया है कि,
“दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥”
मतलब- 10 कुओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ी के बराबर एक तालाब और दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक पेड़ होता है।
पीपल (Aswatha)
विज्ञान और धर्म दोनों ही नजरिए से पीपल का पेड़ सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि, “वृक्षाणां अश्वत्थोहम्”, अर्थात् वृक्षों में मैं पीपल हूं। पद्म पुराण के मुताबिक, पीपल के मूल में ब्रह्मा, मध्य भाग में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास होता है। इसे काटने से ब्रह्महत्या का पाप लगता है और वंश की हानि होती है।
बरगद (Vatavriksha)
बरगद जिसे आम भाषा में वटवृक्ष और अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के मुताबिक, यह पेड़ साक्षात शिव का रूप है। प्रलय काल में भी बाल मुकुंद (श्रीकृष्ण) वटवृक्ष के पत्ते पर ही प्रकट हुए थे। बरगद के पेड़ को काटने से मनुष्य की उम्र और सौभाग्य क्षय होता है।
नीम (Margosa)
हिंदू पुराणों में नीम के पेड़ को नारायणी और साक्षात मां दुर्गा का प्रतीक माना गया है। शीतला देवी का वास भी इसी पेड़ में होता है। औषधीय गुणों से युक्त होने के कारण इसे काटना जनमानस की सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
आंवला (Amala)
कार्तिकेय महात्मय और मत्स्य पुराण में आंवले के पेड़ की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। आंवले के पेड़ में साक्षात भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का निवास मान जाता है। इस पेड़ को काटने से जीवन के संचित पुण्य नाश होने के साथ व्यक्ति को दरिद्रता घेर लेती है।
बेल (Bilva)
बेल का पेड़ भगवान शिव को काफी प्रिय है। शिव पुराण के मुताबिक, बेल के पेड़े के पत्तों और छाल में माता पार्वती के अलग-अलग रूप (गिरिजा, गौरी, कात्यायनी) का वास होता है। माना जाता है कि, बेल के पेड़ को काटना से शिवजी नाराज होते हैं और घोर पाप की श्रेणी में भी आता है।
शमी (Shami)
रामायण और महाभारत काल से ही शमी का पेड़ अत्यंत पूजनीय वृक्षों में शामिल है। इस वृक्ष में अग्नि देव और शनि देव का वास माना जाता है। भगवान राम ने लंका पर विजय हासिल करने से पहले शमी के पेड़ की पूजा की थी। पुराणों के मुताबिक, शमी के पेड़ को काटने से गृहक्लेश और घोर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अशोक (Ashoka)
अशोक नाम से साफ पता चल रहा है, जो शोक को दूर करने वाले हो। पद्म पुराण के मुताबिक, जिस घर के आंगन में अशोक का पेड़ होता है, वहां शोक और अकाल मृत्यु का वास नहीं होता। इस पेड़ में काम देव और माता लक्ष्मी का वास माना गया है। शास्त्रों में अशोक के पेड़ को काटना अपराध बताया गया है।
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