बेहद अनूठा है पद्भनाभ मंदिर, माता-पिता के साथ जरुर करें दर्शन

बेहद अनूठा है पद्भनाभ मंदिर, माता-पिता के साथ जरुर करें दर्शन

केरल स्थित तिरुवनंतपुरम में मौजूद पद्मनाभ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है जो पूरी दुनिया में जाना जाता है। इसके अलावा इस मंदिर की गिनती दुनिया के रहस्मयी जगहों में होती है। इस मंदिर में कई ऐसे रहस्य हैं जो लाख कोशिशों के बाद भी नहीं सुलझ पाया है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर को 6वीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था जिसका जिक्र 9वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है। इस मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए स्त्रियों को मुंडु यानी कि एक तरह की धोती पहननी पड़ती है। सलवार कमीज पहनकर आने वाली औरतें अपने ऊपर धोती पहनकर मंदिर में प्रवेश करती हैं। इसके अलावा महिलाओं व पुरुषों दोनों को ही बिना धोती पहनें अंदर नहीं आने दिया जाता है।बेहद अनूठा है पद्भनाभ मंदिर, माता-पिता के साथ जरुर करें दर्शन

बताया जाता है कि ये दुनिया का सबसे धनी हिंदू मंदिर है। इस मंदिर को किसी भी तरह खोला गया को मंदिर नष्ट हो सकता है, जिससे भारी प्रलय आ सकता है। इस मंदिर में 7 तहखाने हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में खोले गया था। इस दौरान एक लाख करोड़ रुपये के हीरे और जूलरी मिले थे। इसके बाद जैसे ही टीम ने वॉल्ट-बी यानी की सातवां दरवाजे के खोलने की शुरुआत की तो दरवाजे पर बने कोबरा सांप के चित्र को देखकर काम रोक दिया गया।

मान्यताओं के अनुसार त्रावणकोर के महाराज ने बेशकीमती खजाने को इस मंदिर के तहखाने और दीवारों के पीछे छुपाया था। जिसके बाद हजारों सालों तक किसी ने नहीं खोला। इसके बाद उसे शापित माना जाने लगा। बताया जाता है कि मंदिर के दरवाजे को सिर्फ कुछ मंत्रों के उच्चारण से खोला जा सकता है। कहा जाता है कि इस दरवाजे को नाग बंधम या नाग पाशम मंत्रों का प्रयोग कर बंद किया है।

साल 1991 में त्रावणकोर के अंतिम महाराजा बलराम वर्मा की मौत हो गई। साल 2007 में एक पूर्व आईपीएस अधिकारी सुंदरराजन ने एक याचिका कोर्ट में दाखिल कर राज परिवार के अधिकार को चुनौती दी। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तहखाने खोलकर खजाने का ब्यौरा तैयार करने को कहा। 27 जून साल 2011 को तहखाने खोलने का काम शुरू किया गया।

माना जाता है कि मार्तंड वर्मा ने पुर्तगाली समुद्री बेडे और उसके खजाने पर भी कब्जा कर लिया था। यूरोपीय लोग मसालों खासकर काली मिर्च के लिए भारत आते थे। त्रावणकोर ने इस व्यवसाय पर कब्जा कर लिया था। मसालों के व्यापार से काफी फायदा होता था और इस संपत्ति को मंदिर में रख दिया जाता था। पूरे राज्य की संपत्ति ही मंदिर में रखा गया था।

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