डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की डॉ. प्रभजोत कौर ने समय से पहले जन्मे बच्चों में रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी नामक गंभीर आई डिजीज के बारे में बताया है।
नई दिल्ली स्थित डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थल्मोलॉजिस्ट, डॉ. प्रभजोत कौर के अनुसार, समय से पहले जन्म लेने वाले या कम वजन वाले बच्चों की आंखों में एक बेहद गंभीर समस्या हो सकती है।
इसे मेडिकल भाषा में आरओपी (Retinopathy of Prematurity – ROP) कहा जाता है। अगर सही समय पर इस बीमारी को पहचाना और इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह बच्चे की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकती है।
इस आर्टिकल में डॉक्टर की मदद से आपको आसान शब्दों में समझा रहे हैं कि यह बीमारी क्या है और आप अपने शिशु की आंखों को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं।
ROP क्या है और यह क्यों होता है?
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों की आंखों के रेटिना की ब्लड वेसल्स पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाती हैं। जन्म के बाद इन नसों का विकास या तो बहुत धीमा हो जाता है या फिर असामान्य तरीके से होने लगता है।
अस्पताल में बच्चे को दी जाने वाली अनियंत्रित ऑक्सीजन और शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी इस समस्या को और ज्यादा बढ़ा सकती है। कई बार यह बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि तुरंत इलाज की जरूरत पड़ जाती है।
किन बच्चों को है स्क्रीनिंग की सबसे ज्यादा जरूरत?
डॉ. कौर के अनुसार, नीचे दी गई परिस्थितियों में रेटिना विशेषज्ञ से आंखों की जांच करवाना जरूरी होता है:
कम समय और कम वजन: गर्भावस्था के 34 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले और/या 2 किलोग्राम से कम वजन वाले सभी बच्चे।
NICU में भर्ती बच्चे: जिन बच्चों को जन्म के बाद NICU में मुश्किल समय बिताना पड़ा हो या जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ी हो।
अन्य स्वास्थ्य समस्याएं: जिन शिशुओं को सांस लेने में तकलीफ, खून की कमी या प्लेटलेट्स कम होने की समस्या रही हो।
डॉक्टर की सलाह: अगर इलाज कर रहे शिशु रोग विशेषज्ञ जांच की सलाह देते हैं।
बाहर से सामान्य दिखने पर भी हो सकता है खतरा
ROP एक साइलेंट बीमारी है। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआत में बच्चे की आंखें बाहर से देखने पर बिल्कुल सामान्य लगती हैं।
जब तक आंखों में सफेद चमक, कम देखने की क्षमता या आंखों का आकार छोटा होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी होती है। इस अंतिम चरण में आंखों को जो नुकसान होता है, उसे अक्सर ठीक नहीं किया जा सकता।
सही समय पर जांच है सबसे बड़ा बचाव
अच्छी खबर यह है कि समय पर की गई स्क्रीनिंग और इलाज से अंधेपन को पूरी तरह से रोका जा सकता है। अगर शुरुआत में ही बीमारी पकड़ में आ जाए और नियमित रूप से डॉक्टर को दिखाया जाए, तो समय से पहले जन्मे बच्चे भी एक स्वस्थ दृष्टि के साथ सामान्य जीवन जी सकते हैं।
इसलिए, माता-पिता के लिए सबसे जरूरी सलाह यही है कि बच्चे की आंखों में किसी भी लक्षण के दिखने का इंतजार न करें। बच्चे के जन्म के दिन से एक महीने (आदर्श रूप से 3 से 4 सप्ताह) के भीतर ही किसी अच्छे रेटिना स्पेशलिस्ट से ROP की जांच जरूर करवाएं।
Live Halchal Latest News, Updated News, Hindi News Portal