नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह द्वारा भारत की जमीन कब्जा करने संबंधी विवादित बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के कारण सोमवार को नेपाली संसद के दोनों सदनों, प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। लोकतंत्र के मंदिर में उपजे इस गतिरोध ने भारत-नेपाल सीमा विवाद की संवेदनशीलता को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
दरअसल नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को कहा था कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है।
उनके इस बयान से विपक्ष भड़क उठा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देश इस मुद्दे को सुलझाने के लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमत हुए हैं। काठमांडू ने इस संबंध में चीन और ब्रिटेन के सामने भी बात रखी है, लेकिन विपक्ष पीएम से माफी की मांग पर अड़ गया।
हंगामे की भेंट चढ़ी संसद
वहीं, सोमवार को जैसे ही संसद की कार्यवाही शुरू हुई। विपक्षी सांसद अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध जताने लगे। राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण प्रसाद दहल ने पहले बैठक को 20 मिनट के लिए स्थगित की, लेकिन दोबारा शुरू होने पर भी हंगामा शांत नहीं हुआ। आखिरकार, दोनों सदनों की बैठकें मंगलवार तक के लिए टाल दी गईं।
इस बीच, रविवार को प्रतिनिधि सभा में कुछ सांसदों के अशोभनीय और आपत्तिजनक व्यवहार की जांच के लिए सचिव प्रकाश अधिकारी के नेतृत्व में एक संसदीय जांच समिति का गठन किया गया है।
संसद नियमावली के तहत बनी यह कमेटी सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
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