पटना के निकट बाढ़ विधानसभा से हालिया चुनाव लड़ चुके राजद के बाहुबली नेता कर्णवीर सिंह यादव उर्फ लल्लू मुखिया ने शनिवार को स्थानीय व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके पास सरेंडर के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था। सरेंडर के महज छह घंटे बाद ही उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में बाढ़ जेल भेज दिया गया।
हत्या के मामले में थे फरार, पुलिस कर रही थी लगातार छापेमारी
लल्लू मुखिया 2023 के एक हत्या कांड (केस नं. 98/23) में मुख्य अभियुक्त हैं। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कुछ महीनों के लिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी, जिसकी वजह से वे खुलेआम रैलियाँ कर रहे थे। लेकिन जैसे ही रोक की अवधि खत्म हुई, पुलिस का शिकंजा कसने लगा। चुनाव परिणाम आने के बाद से वे भूमिगत हो गए थे।
घर की कुर्की के बावजूद नहीं माने, आखिरकार हार मान ली
चुनाव से ठीक पहले पुलिस ने उनके घर व संपत्ति की कुर्की भी कर दी थी, फिर भी लल्लू मुखिया ने सरेंडर करने के बजाय छिपते रहे। एक समय मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के बेहद करीबी रहे लल्लू मुखिया अब खुले आम जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने ही उन्हें इस केस में फँसवाया है।
कोर्ट पहुँचते ही खत्म हुआ पूरा ड्रामा
शनिवार दोपहर जैसे ही लल्लू मुखिया भारी सुरक्षा के बीच बाढ़ कोर्ट परिसर में पहुँचे, सैकड़ों समर्थक जमा हो गए। आत्मसमर्पण के बाद कोर्ट प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम तक उन्हें बाढ़ जेल भेज दिया गया। उनके वकील संजय कुमार ने बताया कि अब नियमित जमानत के लिए फिर से हाईकोर्ट का रुख किया जाएगा।
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