इस बार मानसून एक जुलाई को पंजाब पहुंचा था और नौ जुलाई तक पूरे राज्य में सक्रिय हो गया था। इसके बावजूद जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई।
पंजाब में मानसून के पहले महीने जुलाई में बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में जुलाई में सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है।
सामान्य 161.4 मिलीमीटर के मुकाबले इस बार केवल 119.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जून और जुलाई में कम बारिश का असर प्रमुख बांधों के जलस्तर पर भी पड़ा है। इससे आने वाले दिनों में सिंचाई के लिए पानी की कमी और बिजली उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
इस बार पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और फरीदकोट को छोड़कर सभी जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। कई जिलों में कमी 71 फीसदी तक दर्ज की गई।
पठानकोट में सबसे अधिक 495.5 एमएम बारिश हुई जबकि मानसा में सबसे कम 38.4 एमएम बारिश दर्ज की गई। मानसा के अलावा मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, फतेहगढ़ साहिब और फाजिल्का में भी बारिश की कमी रही।
बांधों में भी कम हुआ पानी का भंडार
कम बारिश का असर हिमाचल प्रदेश स्थित प्रमुख बांधों पर भी दिखाई दे रहा है। भाखड़ा बांध में इस समय पानी का स्तर 1599.33 फुट है जो पिछले साल के मुकाबले 21.67 फुट कम है। वहीं पौंग बांध में जलस्तर 1338.40 फुट दर्ज किया गया है जो पिछले साल की तुलना में 15.69 फुट नीचे है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा, पौंग और कोल बांधों के जलाशयों में कुल भंडारण सामान्य से 10.83 फीसदी कम है। पंजाब के रणजीत सागर बांध में भी जल भंडारण सामान्य से 9.21 फीसदी कम दर्ज किया गया है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी परिस्थितियों के कारण मानसूनी बारिश प्रभावित हुई है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी वाली हवाओं और कम दबाव वाले सिस्टम का पंजाब की ओर रुख नहीं करने से भी बारिश कम हुई। अब अगस्त की बारिश पर सभी की नजरें टिकी हैं।
मौसम विभाग ने पांच अगस्त तक पंजाब के कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। अगर अगस्त में भी बारिश कम रहती है तो बांधों में जलस्तर और नीचे जा सकता है जिससे सिंचाई और बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
चार जिलों में ही सामान्य से ज्यादा बारिश
पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर और फरीदकोट में जुलाई में बारिश सामान्य से अधिक रही। पठानकोट में सबसे ज्यादा 495.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं मानसा में सबसे कम 38.4 एमएम बारिश हुई।
अगस्त की बारिश पर टिकी उम्मीद
कम बारिश से किसानों के सामने सिंचाई के पानी की चुनौती खड़ी हो सकती है। वहीं बांधों में कम पानी होने से बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। अब अगस्त में अच्छी बारिश ही राहत दे सकती है।
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