संजीव अरोड़ा खत्री-अरोड़ा समाज से आते हैं जिसकी शहरी क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका मानी जाती है। अनुमान के मुताबिक पंजाब के शहरों में करीब 20 फीसदी वोट अरोड़ा और 12 फीसदी खत्री समाज का है। इन मतदाताओं में बड़ी हिस्सेदारी शहरी हिंदू और सिख मतदाताओं की है।
पार्टी ने लुधियाना से विधायक और उद्योगपति संजीव अरोड़ा को पंजाब का नया निकाय मंत्री बनाकर शहरी विकास की कमान सौंप दी है। इसे आप की उस रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है जिसके तहत पार्टी शहरी इलाकों के करीब 32 फीसदी खत्री-अरोड़ा वोट बैंक और उद्योग-व्यापार वर्ग को साधना चाहती है।
संजीव अरोड़ा खत्री-अरोड़ा समाज से आते हैं जिसकी शहरी क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका मानी जाती है। अनुमान के मुताबिक पंजाब के शहरों में करीब 20 फीसदी वोट अरोड़ा और 12 फीसदी खत्री समाज का है। इन मतदाताओं में बड़ी हिस्सेदारी शहरी हिंदू और सिख मतदाताओं की है।
आप नेतृत्व का मानना है कि अरोड़ा की नियुक्ति से न केवल सामाजिक संतुलन साधा जाएगा बल्कि उद्योगपतियों, व्यापारियों और मिडिल क्लास में भी पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ेगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आप ऐसे चेहरे की तलाश में थी जो शहरी राजनीति को समझता हो, प्रशासनिक दक्षता रखता हो और व्यापार-उद्योग से संवाद कर सके। लुधियाना जैसे औद्योगिक शहर से आने वाले संजीव अरोड़ा इस प्रोफाइल में फिट बैठते हैं। उपचुनाव में उन्होंने न केवल आप का वोट प्रतिशत बढ़ाया, बल्कि कांग्रेस और भाजपा के शहरी वोट बैंक में भी सेंध लगाई। खत्री-अरोड़ा समाज से सात विधायक और दो मंत्री हैं। कुल मिलाकर, संजीव अरोड़ा को निकाय विभाग सौंपना आप की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिये पार्टी आगामी चुनावों से पहले शहरी वोट बैंक को मजबूती से अपने पाले में लाना चाहती है।
निकाय चुनाव से सबक
पिछले साल हुए निकाय चुनावों में आप का शहरी प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था। 961 वार्डों में से पार्टी 522 पर ही जीत दर्ज कर सकी थी। इसी अनुभव के बाद पार्टी ने शहरी रणनीति पर नए सिरे से काम शुरू किया। जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला और मोहाली जैसे शहरों में नगर निगम की कार्यशैली सीधे तौर पर वोटरों की राय तय करती है।
निकाय विभाग का महत्व
निकाय विभाग का सीधा संबंध प्रॉपर्टी टैक्स, सीवरेज, सड़क, पेयजल, बाजार, दुकानों, कमर्शियल एरिया, बिल्डिंग प्लान, एनओसी और लाइसेंसिंग से है। इन फैसलों का असर सीधे व्यापारियों, उद्यमियों और नौकरीपेशा वर्ग पर पड़ता है। ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि अरोड़ा के नेतृत्व में शहरी विकास के जरिए सियासी लाभ मिलेगा।
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