तिब्बत सीमा से सटे नेपाल के पहाड़ी इलाकों में प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया है जिसकी कल्पना भी डरावनी है। इस भीषण बाढ़ में अब तक 987 से अधिक लोगों की मोत हो चुकी हैं। तबाही का मंजर ऐसा है कि 3916 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों में 275 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के 128 लोग शामिल हैं। इनमें से अधिकांश श्रद्धालु हैं जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे, लेकिन रास्ते में ही इस आपदा का शिकार हो गए। पहाड़ों से बहकर आ रहे शवों के कारण नेपाल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों पर काफी दबाव है।
अस्पतालों के मुर्दाघरों में तिल रखने की भी जगह नहीं बची है। अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि मिले शवों में कितने विदेशी सैलानी या तीर्थयात्री हैं। अपनों की तलाश में भटकते बदहवास रिश्तेदारों की मदद के लिए सरकार ने बरामद शवों की तस्वीरों का एक पावरपॉइंट स्लाइड शो तैयार किया है, ताकि वे अपने प्रियजनों की पहचान कर सकें।
कैसे करें नेपाल बाढ़ पीड़ितों के शवों की पहचान और दावा?
नेपाल में स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय परिवारों को उनके प्रियजनों के शवों की पहचान करने में सहायता के लिए चरण-दर-चरण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दूतावास ने बताया कि नेपाल सरकार मृतकों की तस्वीरें और विवरण जारी कर रही है, जिन्हें वेबलिंक के माध्यम से देखा जा सकता है।
यदि कोई परिवार तस्वीरों के माध्यम से शव की पहचान करने में सक्षम होता है, तो दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय करके पार्थिव शरीर सौंपने और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया में पूरी मदद करेगा। नेपाल सरकार ने शवों पर दावा करने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की है, जो इस प्रकार है।
अवशेषों/शवों का दस्तावेजीकरण
शवों की तस्वीरें और डिटेल्स रिकॉर्ड करना
पोस्टमार्टम परीक्षण
मृत्यु के कारण का सत्यापन
औपचारिक रूप से पहचान स्थापित करना
फिंगरप्रिंट/डीएनए/फोरेंसिक नमूना एकत्र करना
मृतक के पासपोर्ट/पहचान पत्र का सत्यापन
दूतावास/वाणिज्य दूतावास के साथ समन्वय पूरा करना
हैंडओवर (सौंपने) का ज्ञापन और रसीद पूरी करना
डीएनए और फोरेंसिक सैंपल मिलान की आवश्यकता
दूतावास ने एक बयान में कहा कि नेपाल सरकार ने स्वास्थ्य जोखिमों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफनाया है। ऐसे शवों की पहचान के लिए प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों के साथ डीएनए मिलान की आवश्यकता होगी।
जिन मामलों में पहचान संभव नहीं हो पाई है या शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल के अधिकारी डीएनए मिलान की सुविधा प्रदान करेंगे।
नेपाली अधिकारी डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए शवों से डीएनए के नमूने ले रहे हैं। मिलान के लिए, मृतकों के करीबी रिश्तेदार अपना डीएनए प्रोफाइल ईमेल dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेज सकते हैं या नेपाली अधिकारियों द्वारा मांगी गई प्रारंभिक जानकारी के साथ अपने खून के नमूने दे सकते हैं।
भारतीय दूतावास के हेल्पलाइन नंबर पर करें संपर्क
सुविधा और मदद के लिए प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों की डीएनए प्रोफाइल को भारतीय दूतावास की ईमेल आईडी eoikathmandufloodsupport@gmail.com पर भी कॉपी किया जा सकता है।
डीएनए प्रोफाइलिंग से संबंधित अन्य जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट https://www.nepalpolice.gov.np/ और उनके हेल्पलाइन नंबर +977 9841616095 पर उपलब्ध है।
किसी भी अतिरिक्त सहायता या पूछताछ के लिए, भारतीय दूतावास से व्हाट्सएप नंबरों +977 9851316807, +977 9709107500, या +977 9810326117 पर संपर्क किया जा सकता है।
नेपाल में शवों को दफनाने की प्रक्रिया शुरू
शवों की शिनाख्त करने के भारी दबाव और कई शवों के बुरी तरह से क्षत-विक्षत होने के कारण नेपाल के अधिकारियों ने सामूहिक दफ्न शुरू कर दिया है। प्रत्येक शव को प्लास्टिक बैग में लपेटकर उस पर एक टैग और लोकेशन नंबर लगाया जा रहा है।
इसे उथली कब्र में दफनाने से पहले अधिकारी डीएनए के नमूने ले रहे हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि भविष्य में डीएनए मिलान के जरिए इन शवों की पहचान उनके परिवारों द्वारा की जा सकेगी और उचित अंतिम संस्कार के लिए उन्हें वापस सौंपा जा सकेगा।
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