जींद: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से जुड़े प्लांट में फिलहाल उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। पानी से आवश्यक मात्रा में गैस नहीं निकलने से संचालन प्रभावित हो रहा है। इस कारण रेलवे को ट्रायल और आवश्यक संचालन के लिए पुणे और चेन्नई से टैंकरों से हाइड्रोजन गैस मंगवानी पड़ रही है।
इससे परियोजना की संचालन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए जींद स्थित प्लांट में पानी से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए हाइड्रोजन गैस तैयार की जानी थी लेकिन प्लांट में गैस उत्पादन क्षमता उम्मीद के अनुरूप नहीं पहुंच पाई है।
क्यों फेल हो रही है जींद प्लांट की तकनीक?
हाइड्रोजन ट्रेन के पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) संचालन के लिए जींद में एक विशेष प्लांट लगाया गया है। तकनीकी दिक्कतों के कारण पानी से उतनी मात्रा में हाइड्रोजन गैस अलग नहीं हो पा रही है जितनी ट्रेन के सुचारू संचालन और परीक्षण के लिए जरूरी है। प्लांट अपनी तय उत्पादन क्षमता के बेहद निचले स्तर पर काम कर रहा है, जिससे रेलवे की समयसीमा प्रभावित हो रही है।
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