राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि एसओ-2 के उत्सर्जन को कम करने के लिए चार कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र की 14 इकाइयों में से 10 ने फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) स्थापित कर लिए हैं।
दिल्ली-एनसीआर में थर्मल पावर से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ-2) को रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट उम्मीद की किरण लाई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि एसओ-2 के उत्सर्जन को कम करने के लिए चार कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र की 14 इकाइयों में से 10 ने फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) स्थापित कर लिए हैं। जिसकी निर्धारित समय सीमा 31 दिसंबर, 2027 थी। एक इकाई एफजीडी का लगाने का काम अप्रैल, 2025 तक पूरा कर लेगा। यही नहीं, अन्य शेष हरियाणा पानीपत टीपीएस की तीन इकाई अमल की प्रक्रिया में हैं।
सीपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, दिल्ली-एनसीआर के 10 किलोमीटर के दायरे में 4 कोयला आधारित स्वतंत्र ताप विद्युत संयंत्र स्थित हैं, जिनमें 14 इकाइयां शामिल हैं, जिनकी संयुक्त कुल स्थापित क्षमता 5,350 मेगावाट है। हरियाणा के झज्जर में महात्मा गांधी टीपीएस, इंदिरा गांधी टीपीएस, हरियाणा के पानीपत में पानीपत टीपीएस और यूपी के गौतमबुद्ध नगर में दादरी टीपीएस हैं। ऐसे में सीपीसीबी ने एसओ-2 के अलावा अन्य उत्सर्जन मापदंडों के लिए अनुपालन की रिपोर्ट दी है, जिसके लिए निर्धारित समय सीमा 31 दिसंबर, 2022 तक थी। दरअसल, एनजीटी ने वायु प्रदूषण को लेकर मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। इस रिपोर्ट में सीआरईए के एक अध्ययन का हवाला दिया गया है।
सीआरईए ने अपनी रिपोर्ट में किया था खुलासा
फिनलैंड बेस्ड स्वतंत्र थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने अपनी एक रिपोर्ट निकाली थी। इसमें खुलासा किया गया था कि दिल्ली की हवा को खराब करने के लिए पराली जलाना या वाहन मुख्य कारण नहीं है, बल्कि थर्मल पावर प्लांट है। जो वातावरण में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।
पावर प्लांट पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से 16 गुना अधिक वायु प्रदूषण फैला रहे हैं। एनसीआर में कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट सालाना 281 किलो टन एसओ-2 उत्सर्जित करते हैं। पिछली सुनवाई में अदालत ने सीपीसीबी, डीपीसीसी, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
29 शहरों में एसओ-2 की वार्षिक औसत सांद्रता 5 से 39 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही
सीपीसीबी ने रिपोर्ट में कहा, साल 2021-2023 के बीच दिल्ली-एनसीआर के 29 शहरों में एसओ-2 की निगरानी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इन 29 शहरों में एसओ-2 की वार्षिक औसत सांद्रता 5 से 39 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही थी, जबकि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक-2009 में निर्धारित वार्षिक औसत सांद्रता सीमा 50.0 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। इनमें दिल्ली की वार्षिक औसत 2021 में 10, 2022 में 9 और 2023 में 8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही।
यूपी के नोएडा में 2021 में 13, 2022 में 17, 2023 में 16, ग्रेनो में 2021 में 12, 2022 में 17, 2023 में 13, गाजियाबाद में 2021 में 16, 2022 में 16, 2023 में 14, मेरठ में 2021 में 15, 2022 में 15, 2023 में 11, मुज्जफरनगर में 2021 में 19, 2022 में 15, 2023 में 16 और बागपत में 2021 में 13, 2022 में 21, 2023 में 19 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही।