सनातन परंपरा में हर महीने पड़ने वाली अमावस्या तिथि का बहुत गहरा धार्मिक महत्व होता है। यह दिन मुख्य रूप से हमारे पितरों के तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के लिए समर्पित माना गया है। इनमें से सावन महीने की अमावस्या, जिसे हम ‘हरियाली अमावस्या’ या ‘श्रावणी अमावस्या’ भी कहते हैं, और भी ज्यादा फलदायी होती है। इस साल यह शुभ तिथि 12 अगस्त 2026 को पड़ रही है।
पितृ दोष और बाधाओं से कैसे पाएं राहत?
अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष की समस्या है या फिर बनते-बनते काम अटक जाते हैं, तो सावन अमावस्या का दिन इसके निवारण के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन अगर सच्चे मन से शिव जी की पूजा के साथ पितरों का स्मरण किया जाए, तो परिवार पर आया बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सबसे पहले भगवान शिव का जल-अभिषेक करें। इसके बाद अपने पूर्वजों की याद में तर्पण करें। पूजा और तर्पण पूर्ण होने के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता अनुसार काले तिल, पोहा, दही, चीनी, चावल और नमक का दान जरूर करें। ऐसा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और घर की आर्थिक तंगी धीरे-धीरे दूर होने लगती है।
पितरों की नाराजगी दूर करने के लिए करें यह उपाय
अगर पितर असंतुष्ट हों, तो जीवन में अक्सर अकारण परेशानियां बनी रहती हैं। उनकी नाराजगी दूर करने के लिए सावन अमावस्या पर जरूरत की वस्तुओं का दान बहुत कारगर माना गया है। इस दिन छतरी, जूते-चप्पल, कंबल और साबुत उड़द का दान करना चाहिए। माना जाता है कि इन चीजों को देने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन की पुरानी रुकावटें खत्म होने लगती हैं।
ब्राह्मण दान से मिलने वाले लाभ
सावन अमावस्या के शुभ अवसर पर किसी सुपात्र ब्राह्मण को सफेद खाद्य पदार्थों का दान करना बेहद शुभ फल देता है। आप उन्हें गेहूं का आटा, चावल, चीनी, नमक, दूध या दही जैसी वस्तुएं दे सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सफेद वस्तुओं के दान से कुंडली में कमजोर या अशुभ ग्रहों का बुरा असर कम होता है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है।
पिंडदान का फल
सावन अमावस्या के दिन किया गया कोई भी धर्म-कर्म, पिंडदान या दान-पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। जब पूर्वज प्रसन्न होते हैं, तो घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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